कसौटी पर नीति
नई शिक्षा नीति (एनईपी) की पहली वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की शुरुआत की। जो उच्च शिक्षा में छात्रों के लिए कई प्रवेश और निकास का विकल्प प्रदान करेगा। गुरुवार को एनईपी और इसके प्रावधानों के अनुरूप कई योजनाओं की शुरूआत की गई। नेशनल डिजिटल एज्यूकेशन आर्किटेक्चर (एनडीईएआर) …
नई शिक्षा नीति (एनईपी) की पहली वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की शुरुआत की। जो उच्च शिक्षा में छात्रों के लिए कई प्रवेश और निकास का विकल्प प्रदान करेगा। गुरुवार को एनईपी और इसके प्रावधानों के अनुरूप कई योजनाओं की शुरूआत की गई।
नेशनल डिजिटल एज्यूकेशन आर्किटेक्चर (एनडीईएआर) और राष्ट्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी फोरम (एनईटीएफ) को नीति के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। एनडीईएआर एकल मंच होगा जो शिक्षा क्षेत्र में आने वाली समस्याओं के लिए डिजिटल समाधान प्रदर्शित करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समर्पित वेबसाइट लांच की गई, इससे युवाओं को भविष्योन्मुखी बनाने में मदद मिलेगी।
गत वर्ष केंद्र सरकार ने एनईपी की घोषणा की थी। नई नीति ने 1986 में तैयार शिक्षा पर राष्ट्रीय नीति की जगह ली थी। उसे देखते हुए कहा गया कि सरकार ने बदलावों को लेकर किसी भी तरह की हिचक नहीं दिखाई। चाहे शिक्षा व्यवस्था का दायरा बढ़ाते हुए उसमें तीन साल के प्री-स्कूलिंग पीरियड को शामिल करने की बात हो, या कम से कम पांचवीं तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय अथवा क्षेत्रीय भाषा को बनाने का, ऐसे तमाम बड़े फैसले इसमें शामिल हैं, जिन पर बहस होती रही है।
एनईपी की शुरुआत प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता को बढ़ाने, शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने, क्षमता निर्माण करने और सीखने के परिदृश्य को बदलने के लक्ष्य से की गई। कहा गया कि नई नीति स्कूल एवं उच्च शिक्षण प्रणालियों में परिवर्तनकारी सुधार के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
देशवासी भविष्य में कितना आगे जाएंगे, कितनी ऊंचाई प्राप्त करेंगे, ये इस बात पर निर्भर करता है कि युवाओं को वर्तमान में कैसी शिक्षा दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में एक कारक है। आज बन रही संभावनाओं को साकार करने के लिए हमारे युवाओं को दुनिया से एक कदम आगे होना पड़ेगा, एक कदम आगे का सोचना होगा। इंजीनिरिंग के कोर्स का 11 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए एक टूल भी विकसित किया जा चुका है।
उम्मीद की जा सकती है कि प्रधानमंत्री की पहल एनईपी के तहत परिकल्पित कई लक्ष्यों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी। समझा जा सकता है कि नयी शिक्षा नीति को भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है और इससे देश का भाग्य बदलेगा। संकेत भाषा (साइन लैंग्वेज) को विषय का दर्जा दिया गया है। इसका लाभ दिव्यांगों को मिलेगा। व्यापक बदलाव की उम्मीद जगाती नई शिक्षा नीति अमल की कसौटियों पर कितना खरा उतरती है, यह देखने के लिए अभी इंतजार तो करना ही होगा।
