पूर्वोत्तर में तनाव
पिछले सोमवार को हुई हिंसा के बाद से असम-मिजोरम सीमा पर तनाव लगातार बढ़ा है। असम सरकार ने राज्य के लोगों से अशांत परिस्थितियों के मद्देनजर परामर्श जारी कर मिजोरम नहीं जाने की सलाह दी है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि देशवासी एक प्रांत से दूसरे प्रांत में न जा पाएं। असम की बराक घाटी के लोगों …
पिछले सोमवार को हुई हिंसा के बाद से असम-मिजोरम सीमा पर तनाव लगातार बढ़ा है। असम सरकार ने राज्य के लोगों से अशांत परिस्थितियों के मद्देनजर परामर्श जारी कर मिजोरम नहीं जाने की सलाह दी है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि देशवासी एक प्रांत से दूसरे प्रांत में न जा पाएं।
असम की बराक घाटी के लोगों ने आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी है, इससे मिजोरम में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। राज्य सरकार ने दो अन्य पड़ोसी राज्यों से राशन व अन्य वस्तुएं मंगवाना शुरू कर दिया है। असम की ओर से राज्य में बीते दो दिन से किसी वाहन ने प्रवेश नहीं किया है।
सोमवार को असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद को लेकर जिस तरह की हिंसक झड़प हुई थी, वह न केवल इन दोनों राज्यों की सरकारों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए चिंता की बात है। पूर्वोत्तर में अक्ससर सीमा पर कई मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति रहती है। साथ ही, इस बात को भी समझना होगा कि दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद बहुत पुराना है। इसकी जड़ें औपनिवेशिक शासन तक जाती हैं।
लेकिन जिस तरह की हिंसा असम और मिजोरम के पुलिस बलों के बीच हुई है, वह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकती। प्रशासनिक व राजनीतिक पहल समय रहते की जाती तो इस हिंसा को टाला जा सकता था। वैसे तो पिछले साल अक्टूबर में दोनों राज्यों की सीमाओं के बीच झड़पें हुई थीं और दोनों ने एक-दूसरे पर अपने क्षेत्र के अतिक्रमण के आरोप लगाये थे।
जहां तक सवाल सीमा संबंधी विवाद का है तो देश के नियम कानून और संविधान के मुताबिक तमाम मंच उपलब्ध हैं, जहां दोनों सरकारें अपना पक्ष लेकर जा सकती हैं। ऐसे में नहीं लगता कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री लंबित सीमा विवाद को अपने बूते हल करने में सक्षम होंगे। ऐसे में केंद्र सरकार को पूर्वोत्तर पर सबसे अधिक ध्यान देना जरूरी है।
नहीं भूलना चाहिए कि पूर्वोत्तर दशकों तक उग्रवाद का शिकार रहा है। हिंसक घटनाएं उग्रवाद को पैर जमाने का मौका दे सकती हैं। देश के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी घातक हो सकती है। विवाद को उपयुक्त ढंग से हल करने की प्रक्रिया तो अविलंब शुरू होनी ही चाहिए।
असम में राष्ट्रीय राजमार्ग 306 पर आर्थिक नाकेबंदी हटाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को हस्तक्षेप करना चाहिए। यह राष्ट्रीय राजमार्ग मिजोरम को असम के सिलचर के जरिए बाकी के देश से जोड़ता है। हिंसा के मामले में जिन लोगों ने अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वाह नहीं किया है, उनके खिलाफ समुचित कार्रवाई होनी चाहिए।
