बजरंग पुनिया ने गोरखपुर में किया गया वादा टोक्यो ओलंपिक में किया पूरा
गोरखपुर। वर्ष 2018 में आयोजित सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में बतौर मुख्य अतिथि आये बजरंग पुनिया ने जिले के खिलाड़ियों से किया गया वादा शनिवार को टोक्यो ओलंपिक में पूरा कर दिखाया। टोक्यो में खेले जा रहे ओलंपिक खेलों के 15वें दिन शनिवार को पहलवान बजरंग पूनिया ने पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग के फ्रीस्टाइल इवेंट …
गोरखपुर। वर्ष 2018 में आयोजित सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में बतौर मुख्य अतिथि आये बजरंग पुनिया ने जिले के खिलाड़ियों से किया गया वादा शनिवार को टोक्यो ओलंपिक में पूरा कर दिखाया। टोक्यो में खेले जा रहे ओलंपिक खेलों के 15वें दिन शनिवार को पहलवान बजरंग पूनिया ने पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग के फ्रीस्टाइल इवेंट में जैसे ही कांस्य पदक पर दावेदारी पक्का किया, जिले के खिलाड़ी खुशी से झूम उठे। अतीत की बात करें तो साल 2018 में गोरखपुर में सीनियर स्टेट चैंपियनशिप आयोजित हुई थी। इसमे चीफ गेस्ट के रूप में पहलवान बजरंग पुनिया ने शिरकत किया था।
इस दौरान गोरखपुर के खिलाड़ियों के साथ उन्होंने काफी समय दिया था, उन्हें दांव पेंच के टिप्स और अपने सपने के बारे में बताया था। उसी वक्त उन्होंने जाहिर किया था कि ओलंपिक में मेडल लाना ही उनका सपना है, जिसे टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने सच करके दिखाया। बता दें कि गोरखपुर में 2018 में सीनियर स्टेट चैंपियनशिप आयोजित हुई थी। इसमे राज्यस्तरीय बड़े-बड़े पहलवानों ने भाग लिया था।
इस चैम्पियनशीप में गोरखपुर के युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन करने के लिए गोरखपुर निवासी भारतीय कुश्ती टीम के कोच चन्द्रविजय सिंह ने खास तौर से बजरंग पुनिया को इस चैंपियनशिप में चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया था। क्योंकि उसी समय 2018 में जकार्ता एशियन गेम में उस समय बजरंग पुनिया ने गोल्ड जीता था।इस दौरान बजरंग ने खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के टिप्स और उन्हें हर तरह की मदद दिलाने का भी भरोसा दिलाया था।
चंद्रविजय सिंह के अनुसार उन्होंने ओलंपियन बजरंग के साथ लंबा वक्त गुजारा है। बजरंग के सिर पर जीत का ताज तो 2018 में जकार्ता एशियन गेम में गोल्ड जीतने के साथ ही चढ़ गया था। बावजूद इसके बजरंग का सपना कुछ और था। वे इसे लेकर दिन-रात एक किए रहते थे। इसके बाद आखिरी मुलाकात मार्च 2021 में एक कैंप में भी बजरंग से मुलाकात हुई। चंद्रविजय और बजरंग साथ ही रहते थे। लेकिन इसके बाद कोविड की वजह से कैंप ब्रेक हो गया।
चंद्रविजय सिंह ने बताया कि इस बीच हर मुलाकात में बजरंग ओलंपिक को लेकर जरूर चर्चा करते थे। वे चंद्र विजय सिंह से भी इसके लिए राय मशवरा करते रहते थे। चंद्रविजय ने भी बजरंग का मनोबल बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। वे हमेशा बजरंग से कहते थे, अब तुम्ही से उम्मीद है कि देश के लिए तुम कुछ बेहतर कर सकते हो। उन्होंने बताया कि हमने तो बजरंग से गोल्ड की उम्मीद की थी, लेकिन उन्होंने ब्रांज हासिल करके भी देश का मान बढ़ा दिया।
