रामनगर: स्वदेशी धागे से बंधेगा बहन की रक्षा का पक्का वचन

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Edited By Amrit Vichar
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रामनगर, अमृत विचार। भारत आत्म निर्भर बन रहा है और इसकी बानगी रामनगर के बाजार खूबसूरत लग रहे हैं। ये बाजार है राखी है और इस बार बहनें स्वदेशी धागे से भाइयों की कलाई पर रक्षा का पक्का बचन बांधेंगी। खूबसूरती में ये राखियां चाइनीज राखियों पर भारी हैं और दाम में भी। यही वजह …

रामनगर, अमृत विचार। भारत आत्म निर्भर बन रहा है और इसकी बानगी रामनगर के बाजार खूबसूरत लग रहे हैं। ये बाजार है राखी है और इस बार बहनें स्वदेशी धागे से भाइयों की कलाई पर रक्षा का पक्का बचन बांधेंगी। खूबसूरती में ये राखियां चाइनीज राखियों पर भारी हैं और दाम में भी। यही वजह है कि स्वदेशी राखियों की बाजार में खूब डिमांड है।

नंदा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा इन दिनों राखी बनाने का काम तेजी पर है। बाजार में भी सस्ती और स्वदेशी राखी लोगों के मन को भाने लगी है। महिलाओं द्वारा बनाई जा रही राखी की मांग भी अब दुकानों में बढ़ रही है। लोग अब चाइनीज राखी की अपेक्षा हाथ से बनी राखी पसन्द कर रहे हैं।

नंदा स्वयं सहायता समूह की अद्यक्ष नीमा मठपाल ने कहा कि दस महिलाओं के समूह द्वारा जो राखी बनाई जा रही है, उसमें पतले फार्म, गोटे क्राफ्ट पेपर, मोतिया फेब्रिक काल व ऊन का प्रयोग किया गया है। इससे होने वाली आय से कृष्ण जन्माष्टमी के लिए सामग्री बनाने का काम किया जाएगा।

ऐसे छोटे छोटे कार्यक्रम महिलाओं को स्वरोजगार के मार्ग पर ले जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। महिलाओं द्वारा अलग-अलग डिजाइन में राखी तैयार की जा रही है। अध्यक्ष नीमा मठपाल ने बताया कि इनके निर्माण और डिजाइन में दीपा कोटिया, बसंती हाल्सी, बेबी, भावना कांडपाल, ललिता रावत, भगवती पांडे, हीरा नेगी का योगदान रहा।

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