मुरादाबाद: सड़कों पर आवारा कुत्तों का आतंक, रोज 30-40 को बना रहे शिकार
मुरादाबाद, अमृत विचार। इन दिनों आवारा कुत्तों के आंतक से शहर और आसपास के इलाके में दहशत है। बड़े हों या बच्चे आवारा कुत्तों का शिकार होकर जान बचाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर दिन जिला अस्पताल में ऐसे 30 से 40 मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन के लिये पहुंच रहे हैं। इस माह …
मुरादाबाद, अमृत विचार। इन दिनों आवारा कुत्तों के आंतक से शहर और आसपास के इलाके में दहशत है। बड़े हों या बच्चे आवारा कुत्तों का शिकार होकर जान बचाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर दिन जिला अस्पताल में ऐसे 30 से 40 मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन के लिये पहुंच रहे हैं। इस माह अब तक कुत्तों के काटने के 456 पीड़ित अस्पताल पहुंच चुके हैं। फिर भी नगर निगम के अधिकारी इन आवारा कुत्तों व अन्य जानवरों पर अंकुश के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे।
जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 30 से 40 मरीज आवारा कुत्तों का शिकार होकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की कतार लगी है। किसी को पहला इंजेक्शन लग रहा है तो कोई दूसरा, तीसरी डोज का इंजेक्शन लगवा रहा है। आवारा कुत्तों के काटने से बच्चों के चेहरे पर खौफ साफ नजर आता है।
अभिभावक भी अनजाने डर से ग्रसित हैं कि कहीं उनके लाडले को गंभीर दिक्कत न हो। बुधवार को अस्पताल में दिन में एक बजे तक 26 कुत्ता काटने के मरीज पहुंच चुके थे। यह स्थिति कमोवेश हर दिन की बनती जा रही है। लोग कतार में लगकर अपने परिवार के पीड़ित सदस्य को एआरवी लगवाने की बारी का इंतजार कर रहे हैं।
मंगलवार को भी काफी संख्या में कुत्ता काटने के पीड़ित इंजेक्शन लगवाने आए थे। वहीं पीड़ित परिवार आवारा कुत्तों के लिए नगर निगम एवं अन्य अधिकारियों को कोस रहे हैं, आखिर क्यों आवारा कुत्तों को नहीं पकड़ा जाता।
फार्मासिस्ट निश्चल भटनागर ने बताया कि कुत्तों के काटने से पीड़ितों को चार इंजेक्शन लगवाने चाहिए। लेकिन, यह परिस्थिति पर भी निर्भर करता है। सरकारी अस्पताल में इंट्रा डर्मल एआरवी की डोज लगती है। एक वायल में दस इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जबकि प्राइवेट क्लीनिकों में इंट्रा मस्कुलर की एक डोज एक ही मरीज को लगती है।
यह हुए शिकार
केस 1
लवी पुत्र सुरेश कुमार सैनी को मंदिर से आते समय पड़ोसी के कुत्ते ने काट लिया था। अस्पताल में अपने परिवार के सदस्य के साथ एआरवी का इंजेक्शन लगवाने आया था। बच्चा सहमा था। पूछने पर बोला कुछ होगा तो नहीं।
केस 2
जैद पुत्र कल्लू निवासी मैनाठेर बाइक से जा रहे थे। मैनाठेर की पुलिया के पास किसी आवारा कुत्ते ने काट लिया। पैर पर काटने के गहरे जख्म से 12 वर्षीय जैद भयभीत था। परिवार के सदस्य भी सहमें थे कि कहीं कोई गंभीर स्थिति न हो।
केस 3
हरथला सब्जी मंडी की रहने वाली उर्मिला अपने आठ वर्षीय बेटे रितिक शर्मा को कुत्ते के काटने के चलते इंजेक्शन लगवाने आई थीं। बोलीं बिस्किट लेने गया था बच्चा, कुत्ते ने काट लिया, हाथ से बिस्किट भी छीन लिया।
केस 4
कशिश सिंह पुत्री मनोज कुमार गोविंदनगर की रहने वाली हैं। पड़ोस में घूमने वाले कुत्ते ने मंगलवार की शाम को अचानक काट लिया। न जाने अब क्या होगा, कहीं कोई अजीब सी बीमारी न हो जाए, यह सोचकर ही बच्ची परेशान है।
गर्मियों में आवारा कुत्ते घूमते फिरते हैं। स्ट्रीट डॉग अर्थात आवारा कुत्तों में रेबीज वायरस होने की संभावना बहुत अधिक होती है। क्योंकि वह एंटी रेबीज से वैक्सीनेटेड नहीं होते हैं। यदि ऐसे आवारा कुत्ते ने किसी को काट लिया तो तुरंत एंटी रेबीज इंजेक्शन की पूरी डोज लगवानी चाहिए। अन्यथा जरा सी लापरवाही से जानलेवा स्थिति से भी गुजरना पड़ सकता है। डॉ. वीर सिंह, बालरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
