बरेली: कड़े पहरे के बीच गूंजती रहीं या हुसैन की सदाएं…

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बरेली, अमृत विचार। शुक्रवार को यौम-ए-अशूरा पर दिन भर घरों और इमामबाड़ों में इबादत का सिलसिला जारी रहा। जुमे की नमाज के बाद मस्जिदों से इमामों ने यौम-ए-अशूरा की फजीलत को बयान किया। कोविड-19 की वजह से इस बार ताजियों के जुलूस नहीं निकाले जा सके। दस मोहर्रम को बाकरगंज कर्बला पर सुबह से ही …

बरेली, अमृत विचार। शुक्रवार को यौम-ए-अशूरा पर दिन भर घरों और इमामबाड़ों में इबादत का सिलसिला जारी रहा। जुमे की नमाज के बाद मस्जिदों से इमामों ने यौम-ए-अशूरा की फजीलत को बयान किया। कोविड-19 की वजह से इस बार ताजियों के जुलूस नहीं निकाले जा सके। दस मोहर्रम को बाकरगंज कर्बला पर सुबह से ही अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। कर्बला पहुंचे लोगों ने यहां खोदे गए खड्डों के अंदर छोटे ताजिए दफन किए। बाकरगंज इमामबाड़ा पर महिलाओं ने अलम पेश कर चिरागा किया और अपने दिल की मुरादें मांगी। इमाम हुसैन की याद में जगह-जगह लंगर का आयोजन किया गया था। मस्जिदों और घरों के अंदर कर्बला के शहीदों का जिक्र किया गया।

ईदगाह करबला कमेटी के महासचिव डा. सरताज हुसैन अब्बासी ने बताया कि इमामबाड़े में महिलाओं को कोविड-19 गाइडलाइन के मुताबिक ही अंदर जाने दिया गया। पहले यहां करीब 200 से अधिक ताजियों के जुलूस आते थे। सुबह कुरानख्वानी के साथ कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं खानकाह-ए-नियाजिया के प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी ने बताया कि खानकाह पर सुबह से ही नियाज नजर का सिलसिला जारी था जो शाम तक चला। इमामबाड़े पर भी भारी संख्या में आकर महिलाओं ने जियारत की।

अशूरा पर गम-ए-हुसैन में आंसुओं से भर आईं आंखे
स्वालेनगर नगर स्थित कर्बला में जियारत को पहुंचे अकीदतमंदों को कोविड-19 गाइड लाइन के चलते सीमित संख्या में ही अंदर जाने दिया गया। मुतावल्ली जमीर रजा ने बताया कि पूर्व के दिनों में कर्बला तक मातम करते हुए करीब पांच जुलूस आते थे, मगर इस बार यहां आने वाले अकीदतमंदों ने बेहद सादगी के साथ चरागा किया, मेहंदी चढ़ाई और नौहे पढ़े गए। दूसरी तरफ शिया जामा मस्जिद में इमाम-ए जुमा शम्सुल हसन खां ने सुबह यौमे आशूरा के अमाल कराए।

इमामबाड़ा फतेह अली शाह, काला इमामबाड़ा किला में मौलाना ने अली असगर के मसाहिब बयां किए जिसको सुनकर अजादारों की आंखूं में आंसू थे। वहीं शाम-ए-गरीबा की मजलिस इमामबाड़ा हकीम आगा साहब में आयोजित हुई जिसमें मौलाना शम्सुल हसन खां ने शाम-ए-गरीबा पर मसाहिब पढ़े। अन्जुमन गुल्दस्ता-ए हैदरी ने इमामबाड़ा वसी हैदर में नौहाख्वानी की। ऑल इंडिया गुलदस्ता-ए हैदरी के मीडिया प्रभारी शानू काजमी ने बताया कि अंजुमनों ने कोविड गाइडलाइन का पालन कर मजलिस मातम किया।

मुल्क से मोहब्बत का संदेश देती है इमाम हुसैन की शहादत
यौम-ए-आशूरा के मौके पर दरगाह आला हजरत पर दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां की सरपरस्ती में सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां के निवास पर कर्बला के शहीदों को याद किया गया। नजर और लंगर का आयोजन भी किया गया। दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुफ्ती अहसन मियां ने कर्बला के 72 शहीदों को खिराज पेश की। इमाम हुसैन का मकसद दुनिया को यह पैगाम देना था कि इंसान सच्चाई की राह पर सब्र का दामन थामे रखे तो उसे कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता।

मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि शहीद-ए-आजम इमाम हुसैन की शहादत हमें अपने मुल्क से मोहब्बत का संदेश भी देती है। इस मौके पर मौलाना जाहिद रजा, मौलाना बशीरुल कादरी, सैयद फैजन रजा, हाजी जावेद खान, शाहिद खान, परवेज नूरी, ताहिर अल्वी, औरंगजेब नूरी, अजमल नूरी, मंज़ूर खान, आलेनबी, इशरत नूरी, आसिफ नूरी, सैयद माजिद, मुजाहिद बेग, सैयद एजाज आदि मौजूद रहे।

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