हल्द्वानी: समुद्र तल से 7500 फीट वाले मुक्तेश्वर में की थी सिल्वर विजेता अमित ने रेस वॉक की तैयारी
भूपेश कन्नौजिया, अमृत विचार, हल्द्वानी। भारत के 17 साल के रेस वॉकर अमित खत्री ने वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है। अमित ने 10 हजार मीटर रेस वॉक इवेंट में 42 मिनट 17.94 सेकंड का समय निकाला। भारत को चैंपियनशिप के इतिहास में पहली बार रेस वॉकिंग इवेंट में मेडल मिला है। …
भूपेश कन्नौजिया, अमृत विचार, हल्द्वानी। भारत के 17 साल के रेस वॉकर अमित खत्री ने वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है। अमित ने 10 हजार मीटर रेस वॉक इवेंट में 42 मिनट 17.94 सेकंड का समय निकाला। भारत को चैंपियनशिप के इतिहास में पहली बार रेस वॉकिंग इवेंट में मेडल मिला है। यह पहला मौका है, जब भारत ने चैंपियनशिप के एक सीजन में दो मेडल जीते हैं। इससे 4×400 मीटर रिले का ब्रॉन्ज जीता था। यह अमित का पहला इंटरनेशनल टूर्नामेंट था। वे रेस वॉक में 9 हजार मीटर तक आगे थे, लेकिन केन्या के हेरिस्टोन वेनयोनी ने आखिरी दो लैप में गति पकड़ी और अमित से आगे निकल गए।

अमित की इस कामयाबी के पीछे उनके कोच मुक्तेश्वर के समीप धारी ब्लॉक के गांव सुनकिया निवासी चंदन सिंह डंगवाल का हाथ है। उन्होंने अमित को समुंद्र तल से 7500 फिट की ऊंचाई वाले मुक्तेश्वर में कठिन तैयारी करायी थी क्योंकि अमित को अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में रेस के लिए तैयार करना था और यही उसका माइनस प्वाइंट था।
जीत के बाद अमित ने मीडिया से बातचीत पर साफ तौर इस बात को कबूला भी कि उसके प्रदर्शन पर केन्या की हाई एल्टीट्यूड कंडीशन ने असर डाला और उसे रेस के दौरान सांस लेने में परेशानी हो रही थी। नैरोबी समुद्रतल से 1800 मीटर ऊपर है। अमित ने कहा, ‘यह वह रिजल्ट नहीं है, जिसकी मुझे उम्मीद थी। लेकिन मैं सिल्वर मेडल से खुश हूं। मैं यहां के माहौल में ढ़लने के लिए 5 दिन पहले आ गया था, लेकिन हाई एल्टीट्यूड ने मेरे खेल को प्रभावित किया। रेस में कई बार ऐसा हुआ, जब मैं ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था।’ अमित के कोच चंदन सिंह ने बताया कि जब नैरोबी को चैंपियनशिप की मेजवानी मिली थी, तब मैंने अमित को पिछले साल उत्तराखंड के मुक्तेश्वर में लगभग एक माह हाई एल्टीट्यूड में ट्रेनिंग कराई थी। लेकिन केन्या के खिलाड़ी को घरेलू माहौल का फायदा मिला।
पटियाला में मुलाकात हुई थी चंदन की अमित से
हल्द्वानी। चंदन अभी आर्टलरी की 170वीं मीडियम रेजीमेंट में कार्यरत हैं और आर्मी स्पोर्टस इंस्टिट्यूट पूना में प्रैक्टिस कर रहे हैं। बातचीत पर बताया कि अमित से उनकी मुलाकात 2017 में पटियाला में हुई थी और तब से उसे ट्रेन कर रहे हैं। रेस वॉक में चंदन ने भी कई मेडल झटके हैं। वर्ष 2006 से रेस वॉक करने वाले चंदन कई राष्ट्रीय- अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रमिभाग कर चुके हैं।
सर्वप्रथम वर्ष 2008 में वर्ल्ड रेस वॉकिंग चेम्पियनशिप रशिया और यूके के लेमनटन में 20 किमी की दौड़ में प्रतिभाग किया। 2011-12 में 50 किमी की दौड़ भरी जो कि रशिया के सारांश में हुई थी और दौड़ चार घंटे 16 मिनट में पूर्ण की। उसके बाद वर्ष 2013 में एशियन चैंपियनशिप (जापान) में क्वालीफाई किया मौका मिला और चीन के बीजिंग में भाग लिया। वर्ष 2015 में नेशन गेम जो कि केरल में हुए थे उसमें सिल्वर मेडल हासिल किया। 2016 में वर्ल्ड रेस वाकिंग टीम चैंपियनशिप इटली और 2019 में दोबारा एशियन चैंपियनशिप जापान और 2020-21 में नेशनल में प्रतिभाग किया। चंदन का कहना है कि वह ओलंपिक की तैयारी कर रहे हैं और रियो ओलंपिक में प्रतिभाग करने से चूक गए थे जिसका उन्हें मलाल है लेकिन वह आगामी ओलंपिक के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं
