खेल दिवस पर विशेष: स्टेडियम में सुविधा न समान, ऐसे कैसे खिलाड़ी बनेंगे महान

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

मुरादाबाद, अमृत विचार। खेलों में भारत का नाम राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने का सपना तो खिलाड़ी देख रहे हैं, लेकिन सोनकपुर स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए न सुविधाएं हैं और न ही समान। ऐसे में खिलाड़ी कैसे महान बनेंगे यह बड़ा सवाल है। आज खेल दिवस के मौके पर खिलाड़ियों में उत्साह …

मुरादाबाद, अमृत विचार। खेलों में भारत का नाम राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने का सपना तो खिलाड़ी देख रहे हैं, लेकिन सोनकपुर स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए न सुविधाएं हैं और न ही समान। ऐसे में खिलाड़ी कैसे महान बनेंगे यह बड़ा सवाल है। आज खेल दिवस के मौके पर खिलाड़ियों में उत्साह तो भर जाएगा, लेकिन बिना संसाधनों के खिलाड़ी मंडल जिला व देश का नाम कैसे रोशन कर पाएंगे?

पीयूष चावला, मो. शमी जैसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर तथा स्पिनर शिवा सिंह और आर्यन जुयाल जैसे क्रिकेटर देने वाले मुरादाबाद जनपद में खिलाड़ियों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस सोनकपुर स्टेडियम की बात की जाए तो यहां पिछले दो साल से जूडो और टेबल टेनिस के अलावा किसी भी खेल में कोच नहीं है।

खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में किसी भी खेल की सामग्री उपलब्ध नहीं है। यहां खिलाड़ी खुद सामान लेकर आते हैं। चाहे वो बॉक्सिंग के ग्लब्स हों या फुटबॉल। उन्होंने बताया कि यहां पर कोच न होने के कारण प्रैक्टिस भी नहीं हो पाती है। फील्ड में जितने भी खिलाड़ी आते हैं वह या तो किसी सीनियर से सीखते हैं या अपना ही थोड़ा वहुत वर्कआउट करके चले जाते हैं।

जबकि यहां के खिलाड़ी नेशनल और इंटरनेशनल स्तर तक प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर मंडल का नाम रोशन कर चुके हैं। वहीं टेबल टेनिस का भी हाल बद से बदतर है। यहां सुविधा के नाम पर कोच और टेबल ही देखने को मिला। खिलाड़ी आगे बढ़ने के लिए काफी संघर्ष कर रहें हैं। लेकिन, सुविधाओं के आभाव में कई प्रतिभाएं दम भी तोड़ रही हैं। रविवार को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चन्द्र के जन्मदिन को खेल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

कोच न होने पर खिलाड़ी मायूस
शहर के सोनकपुर स्टेडियम में शनिवार को जब अमृत विचार की टीम वहां पहुंची तो खिलाड़ियों में मायूसी दिखीं। ऐसे में एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वॉलीबॉल, फुटबॉल, बास्केटबॉल सहित अन्य खेल के कोच न होने से खिलाड़ियों को अभ्यास करने में दिकक्तों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई युवा खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो अपनी इच्छाशक्ति से स्टेडियम में खुद तो अभ्यास कर ही रहे हैं, दूसरों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं।

स्टेडियम में कोच की कमी है। यहां खिलाड़ी अभ्यास के लिये आते हैं लेकिन, कोच न होने के कारण खिलाड़ियों की तैयारी नहीं हो पाती। रविवार को खेल दिवस पर केवल हॉकी टूर्नामेंट का ही आयोजन किया जायेगा। वहीं सभी खिलाडियों ने अपने-अपने मैदान को अच्छे से तैयार किया है।- अनिमेश सक्सेना, क्रीड़ा अधिकारी।

(प्रिया)

संबंधित समाचार