खटीमा गोलीकांड : शहीदों को आज नमन करेंगे मुख्यमंत्री धामी
खटीमा, अमृत विचार। राज्य गठन के 21 साल बाद ही सही जनभावनाओं के अनुरूप खटीमा गोलीकांड में तत्कालीन मुलायम सरकार की बर्बरता की गवाह पुराने तहसील परिसर में निर्माणाधीन शहीद स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। यह भी संयोग है कि शहीद स्मारक पर पहले श्रद्धांजलि कार्यक्रम में खटीमा के ही विधायक पुष्कर …
खटीमा, अमृत विचार। राज्य गठन के 21 साल बाद ही सही जनभावनाओं के अनुरूप खटीमा गोलीकांड में तत्कालीन मुलायम सरकार की बर्बरता की गवाह पुराने तहसील परिसर में निर्माणाधीन शहीद स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। यह भी संयोग है कि शहीद स्मारक पर पहले श्रद्धांजलि कार्यक्रम में खटीमा के ही विधायक पुष्कर सिंह धामी पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में नमन करेंगे। मंगलवार को दिन भी कार्यदायी संस्था के कर्मी स्टेज व अन्य तैयारियों में जुटे रहे। साथ ही सात शहीदों के नाम का शिलापट बनकर आते ही लगा दिया है।
बता दें कि एक सितंबर 1994 के दिन राज्य आंदोलन में जब विकास की उम्मीद के साथ जनता का हुजूम खटीमा की सड़कों पर उतरा था तो तत्कालीन मुलायम सरकार का प्रशासन बौखला गया और बर्बरता पर उतारू हो गया। देखते ही देखते निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोलियां चला दी गयीं।
सात आंदोलनकारी इस्लामनगर के सलीम, श्रीपुर बिचवा के भगवान सिंह, झनकट के प्रताप सिंह, उमरूकलां के धर्मानंद भटट, रतनपुर के गोपी चंद्र, राजीव नगर के परमजीत सिंह व डंडिया नबाबगंज (बरेली) के रामपाल शहीद हुए थे। खटीमा से निकली चिंगारी ने पूरे प्रदेश में राज्य आंदोलन को गरमा दिया। शहादतों का दौर शुरू हो गया। अंततः अलग उत्तराखंड राज्य का सपना सच हुआ। राज्य गठन के बाद शहीद स्मारक रेलवे पार्क में बना दिया गया जबकि राज्य आंदोलनकारी निरंतर बर्बरता की गवाह पुराने तहसील परिसर में ही स्मारक बनाने की मांग उठाते रहे।
क्षेत्रीय विधायक पुष्कर सिंह धामी की पहल पर कुछ समय पहले पुराने तहसील परिसर में ही 49.5 लाख रुपए से शहीद स्मारक की हरी झंडी मिली। इसके लिए आरडब्लूए के माध्यम से निर्माण शुरू हुआ। इस बीच खटीमा विधायक धामी के मुख्यमंत्री बनते ही उत्साहित क्षेत्र के प्रमुख आंदोलनकारियों ने उनको पहली बार सीएम के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित में आमंत्रण दिया। इसका असर यह रहा कि मुख्यमंत्री धामी ने आमंत्रण स्वीकार कर भरोसा दिलाया। इसके बाद से ही पिछले कुछ दिनों ने शहीद स्मारक का निर्माण कार्य तेज हो गया।
इधर, मंगलवार की दोपहर तक स्टेज व शहीदों के नाम की शिलापट भी लग चुकी थी। ठेकेदार रमेश ढींगरा ने बताया कि अन्य कार्यों में तेजी है। बुधवार के कार्यक्रम के लिए आगे लॉन, सफाई आदि भी दिन भी जारी रही। इसके साथ ही पहली बार जनभावनाओं के अनुरूप पुराने तहसील परिसर में निर्माणाधीन स्मारक में बुधवार को मुख्यमंत्री सुबह श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होकर शहीदों को नमन करेंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से आंदोलनकारी शक्तियां उत्साहित हैं और उनको इस मौके पर शहीदों के सपनों के अनुरूप मुख्यमंत्री से नई उम्मीद भी साफ नजर आ रही है।
