अब हुनरमंद बनेंगे जेल के बंदी, सीखेंगे स्वरोजगार के गुर

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हल्द्वानी, अमृत विचार। अब हल्द्वानी की जेल के बंदी हुनरमंद बनेंगे। चयनित बंदियों को उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वह स्वरोजगार के हुनर सीख सकेंगे। जेल से छूटने के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आजीविका का मौका मिलेगा। हल्द्वानी जेल में विभिन्न अपराधों में 15 सौ से अधिक विचाराधीन और सजायाफ्ता …

हल्द्वानी, अमृत विचार। अब हल्द्वानी की जेल के बंदी हुनरमंद बनेंगे। चयनित बंदियों को उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वह स्वरोजगार के हुनर सीख सकेंगे। जेल से छूटने के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आजीविका का मौका मिलेगा।

हल्द्वानी जेल में विभिन्न अपराधों में 15 सौ से अधिक विचाराधीन और सजायाफ्ता बंदी कैद हैं। इन बंदियों को अपराध से विमुख कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वरोजगार प्रशिक्षण की योजना बनाई गई है। उद्यमिता विकास प्रशिक्षण से बंदियों को विभिन्न व्यवसायों का पाठ्यक्रम कराया जाएगा।

उन्हें तकनीकी और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। जेल से छूटने के बाद इन बंदियों के सामने आजीविका का विकल्प रहेगा। आजीविका का हुनर होने से उनके कदम अपराध की ओर जाने से भी रोके जा सकेंगे। बंदियों को व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के लिए जेल प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए इच्छुक बंदियों का चयन किया जाएगा। इससे बाद इन्हें इनकी योग्यता और क्षमता के हिसाब से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

नैनीताल में चल रहा प्रशिक्षण
हल्द्वानी। नैनीताल जेल में बंदियों के उद्यमिता विकास के लिए प्रशिक्षण चल रहा है। बंदियों को पेंटिंग का हुनर सिखाया जा रहा है। 50 बंदी ट्रेड का प्रशिक्षण ले रहे हैं। जेल से बाहर आने के बाद इन बंदियों के हाथ में पेंटिंग का हुनर होगा। वे आसानी से स्वरोजगार या फिर नौकरी कर सकते हैं।

अक्सर बंदी जेल से छूटने के बाद फिर से आपराधिक वारदात शुरू कर देते हैं। बंदियों को आजीविका का हुनर सिखाने की योजना बनाई है। हुनरमंद बंदी जेल से छूटने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आजीविका चला सकते हैं।-सतीश सुखीजा, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, हल्द्वानी

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