बरेली: चार मूकबधिर बच्चे होंगे ठीक, सुन व बोल सकेंगे

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बरेली, अमृत विचार। जिले के चार जन्मजात मूक-बधिर बच्चे (बोलने और सुनने में अक्षम) सुन व बोल सकेंगे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत कानपुर के डा. एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन उनका निशुल्क उपचार करेगा। ऑपरेशन के लिए रामनगर ब्लॉक की दो वर्षीया बच्ची व आलमपुर-जाफराबाद के तीन बच्चे चयनित किए गए हैं। …

बरेली, अमृत विचार। जिले के चार जन्मजात मूक-बधिर बच्चे (बोलने और सुनने में अक्षम) सुन व बोल सकेंगे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत कानपुर के डा. एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन उनका निशुल्क उपचार करेगा। ऑपरेशन के लिए रामनगर ब्लॉक की दो वर्षीया बच्ची व आलमपुर-जाफराबाद के तीन बच्चे चयनित किए गए हैं। इलाज में लगभग आठ लाख रुपये खर्च आएगा जो आरबीएसके के तहत सरकार वहन करेगी।

सीएमओ डा. बलवीर सिंह ने बताया कि शासन की ओर से जन्मजात मूकबधिरों को शिविर के माध्यम से चिह्नित कर नि:शुल्क उपचार दिया जाता है। इसके लिए शासन की ओर से नामित डा. एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन के तहत काकलियर इम्प्लांट से ऑपरेशन किया जाता है। मई में आरबीएसके के सहयोग से सीएमओ कार्यालय में विशेष परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में विभिन्न ब्लॉकों से मूकबधिर बच्चों का परीक्षण किया गया।

आरबीएसके के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डा. सीपी सिंह ने बताया कि जन्मजात मूक बधिर बच्चों की पहचान जैसे कि बुलाने पर बच्चों द्वारा कोई प्रतिक्रिया न देना, तेज आवाज होने पर इधर-उधर नहीं देखना या नहीं चौंकने से होती है। अपर शोध अधिकारी पीएस आनंद ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ब्लाकों से आए बच्चों को संस्था के विशेषज्ञ परीक्षण के बाद चयनित कर कानपुर के डा. एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल में उपचार के लिए भेजा जाता है।

अब तक जिले में करीब 40 बच्चों को मिला लाभ
आरबीएसके के तहत निशुल्क उपचार के लिए चार ऐसी बीमारियों को रखा गया है जोकि बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसको शासन की ओर से 4डी नाम दिया गया। 4डी में डिसीज, डिफेक्ट, डिफीशिएंसी और डिसएबिलिटी कैटेगिरी आती हैं। इसके तहत चयनित बच्चे को परीक्षण के बाद जिले के अस्पतालों में मिल रहे इलाज से लाभ नहीं होता तो बच्चों को लखनऊ रेफर किया जाता है। इसके तहत अब तक करीब 40 बच्चों को नि:शुल्क उपचार मिल चुका है। इसमें से 27 बच्चे अब तक पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि 13 बच्चों का वर्तमान में भी उपचार चल रहा है।

4डी के तहत चार बच्चों को कानपुर रेफर किया जा रहा है। इन बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सारे इंतेजाम किए गए हैं। अभी तक जिन अभिभावकों के बच्चे ठीक हुए हैं, वह बधाई भी देने आ रहे हैं। हालांकि, इसका श्रेय आरबीएसके टीम को जाता है। इसलिए अभिभावकों से अपील है कि बच्चों में 4डी से संबंधित बीमारियों होने पर घबराएं नहीं बल्कि नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में दिखाएं। -डा. बलवीर सिंह, सीएमओ

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