लखनऊ: राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मातृभाषा के विषय पर हिंदी संस्थान ने आयोजित की संगोष्ठी
लखनऊ। हिंदी दिवस के विशेष उपलक्ष पर लखनऊ के हिंदी भवन में हिंदी संस्थान की ओर से एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मातृभाषा के विषय पर चर्चा की गई। इस मौंके पर हिंदी भाषा में दिए गए बड़े साहित्यकारों के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि …
लखनऊ। हिंदी दिवस के विशेष उपलक्ष पर लखनऊ के हिंदी भवन में हिंदी संस्थान की ओर से एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मातृभाषा के विषय पर चर्चा की गई। इस मौंके पर हिंदी भाषा में दिए गए बड़े साहित्यकारों के योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद डॉ सूर्यप्रताप दीक्षित ने हिंदी भाषा के आज के समय में खोते हुए अस्तित्व के विषय पर चर्चा की गई। साथ ही हिंदी भाषा की विशेषता को बताते हुए अपनी भाषा के प्रति अपने स्वाभिमान को जिंदा रखने की बात कही व अन्य भाषा के प्रयोगों में पराधीनता को उबारने का तरीका बताया। डॉ सूर्यप्रताप ने कहा कि लोग आज के समय में अंग्रेजी शब्द के प्रयोग करके खुद को बड़ा मानने लगते हैं।
जबकि ऐसा नहीं है, ये केवल मात्र एक पराधीनता का समावेश है। हमें आज के समय में इससे निकलने की आवश्यकता है। पराधीनता को आज के समय में लोग बुरार्इ के रुप में ग्रहण कर रहे हैं, जो कि अंग्रेजी शब्दों के अधिकतर प्रयोग से आपके व्यवहार में भी शामिल हो रहा है। हमारी स्वतंत्रता का गहरा संबंध हमारी मातृभाषा के अधिकतर प्रयोग में ही नजर आता है। अपनी मातृभाषा की रक्षा करना देश की रक्षा के बराबर है। लेकिन आज के समय के व्यक्तित्व के चलते हमें अपनी मातृभाषा को खोने का अब चिंतन होने लगा है।
जिसे आज के युवा ही पुन: जीवित कर सकते हैं। कार्यक्रम के अलावा हिंदी दिवस के उपलक्ष पर हिंदी संस्थान में हिंदी के साहित्यकारों की बुक स्टॉल को भी लगाया गया। जिसमें गिफ्ट पैकेट, राष्ट्रकवि दिनकर , महादेवी वर्मा, प्रयोजनमूलक , हिंदी धर्मवीर भारती आदि जैसी अन्य किताबें मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष डॉ सदानन्द प्रसाद गुप्ता, डॉ कुमुद राय, डॉ हरीश कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे। साथ ही कार्यक्रम का संचालन हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक ने किया।
