‘डीएम साहब मैं जिंदा हूं… मेरा मृत सर्टिफिकेट बना दिया, मुझे बचा लीजिए’
हल्द्वानी, अमृत विचार। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने जनता दरबार लगाकर जन समस्याएं सुनीं। जनता दरबार में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, मुआवजा आदि की 24 शिकायतें दर्ज हुईं। उन्होंने अधिकारियों को इन समस्याओं को निस्तारण कर जिला कार्यालय को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनता दरबार में पंजीकृत समस्याओं का मॉनीटरिंग …
हल्द्वानी, अमृत विचार। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने जनता दरबार लगाकर जन समस्याएं सुनीं। जनता दरबार में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, मुआवजा आदि की 24 शिकायतें दर्ज हुईं। उन्होंने अधिकारियों को इन समस्याओं को निस्तारण कर जिला कार्यालय को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनता दरबार में पंजीकृत समस्याओं का मॉनीटरिंग की जाएगी। यदि मॉनीटरिंग में किसी भी अधिकारी के खिलाफ लापरवाही बरती गई तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को नैनीताल रोड स्थित कैंप में जिलाधिकारी गर्ब्याल ने जनता दरबार लगाया। इस दौरान एक अजब-गजब मामला सामने आया। भावना देवी निवासी गोरापड़ाव ने प्रार्थना पत्र सौंप कर बताया कि वह जीवित है कि जबकि उन्हें 18 साल पहले वर्ष 2003 में मृत घोषित कर डेथ सर्टिफिकेट बना दिया गया। इस पर जनता दरबार में मौजूद अधिकारी भी दंग रह गए। उन्होंने एसडीएम को इस प्रकरण की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। 80 वर्षीय मथुरा दत्त पंत ने बताया कि उनका बेटा रविंद्र पंत प्रताड़ित करता है। इस पर डीएम ने एसडीएम को जांच कर कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान अपर जिलाधिकारी हरवीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, उप जिलाधिकारी मनीष कुमार, ईई जलसंस्थान एसके श्रीवास्तव, लोनिवि ईई अशोक कुमार आदि मौजूद थे ।
ये समस्याएं भी हुईं दर्ज
1- जगदीश चंद्र निवासी ओखलकांडा ने कहा कि अप्रैल में कोविड-19 हुआ। बॉम्बे अस्पताल में भर्ती हुआ और आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी 1.90 लाख रुपए का बिल वसूला गया। इस पर सीएमओ को चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्राधिकरण से बजट दिलाने के निर्देश दिए।
2- कमल मुनि, पार्षद मनोज कांडपाल ने नवीन मंडी पर गंदे नाले से जलभराव व सड़क के गड्ढों की समस्या बताई। इस पर सिंचाई ईई व एनएच अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
3-नरेन्द्र सिह कोरंगा निवासी शास्री नगर बिंदुखत्ता ने कहा कि लोनिवि ने क्षेत्र में 45 लाख की लागत से रोड एवं पुलिया का निर्माण कराया था इससे क्षेत्रीय लोगों का आवागमन होता था। इसको क्षतिग्रस्त कर रास्ता बंद कर दिया है। मार्ग खुलवाने की मांग की।
