हल्द्वानी: कचरे के पहाड़ हो गए तैयार, कंपोस्ट प्लांट को अनुमति का इंतजार

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हल्द्वानी, अमृत विचार। ट्रंचिंग ग्राउंड में तैयार हुए कचरे के पहाड़ को खत्म करने की एक बार फिर से कोशिश शुरू हो गई है। नगर निगम द्वारा शहरी विकास निदेशालय से कंपोस्ट प्लांट तैयार करने की अनुमति ली जा रही है। दस दिन के भीतर हरी झंडी मिलते ही, री-टेंडर की प्रक्रिया एक बार फिर …

हल्द्वानी, अमृत विचार। ट्रंचिंग ग्राउंड में तैयार हुए कचरे के पहाड़ को खत्म करने की एक बार फिर से कोशिश शुरू हो गई है। नगर निगम द्वारा शहरी विकास निदेशालय से कंपोस्ट प्लांट तैयार करने की अनुमति ली जा रही है। दस दिन के भीतर हरी झंडी मिलते ही, री-टेंडर की प्रक्रिया एक बार फिर से शुरू की जाएगी। दावा किया जा रहा है कि टेंडर होता है तो एक साल के भीतर प्लांट तैयार होगा और फिर कचरे के पहाड़ घटने शुरू हो जाएंगे।

गौलापार बाइपास स्थित करीब चार हेक्टेयर भूमि में बने ट्रंचिंग ग्राउंड में हल्द्वानी-काठगोदाम के अलावा नैनीताल, भीमताल, भवाली और लालकुआं से कचरा पहुंचता है। पिछले कई सालों से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर कोशिश की जा रही है। लेकिन टेंडर न हो पाने के कारण कोशिशें सफल नहीं हो रही हैं। इस वजह से इस ग्राउंड में करीब 20 हजार टन से भी ज्यादा कचरे के कई पहाड़ तैयार हो गए हैं। नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने कंपोस्ट प्लांट प्रोजेक्ट और रिसाइक्लिंग सिस्टम को तैयार करने के लिए शहरी विकास निदेशालय से री-टेंडर के लिए अनुमति मांगी है।

क्यों नहीं हो पाता है टेंडर
जानकारों की माने तो टेंडर न होने का कारण कचरे का उत्पादन कम होना है। खाद बनाने के लिए प्रतिदिन डेढ से दो हजार टन कचरे की आवश्यकता है। जबकि प्रतिदिन डेढ़ सौ से दो सौ टन ही कचरा ट्रंचिंग ग्राउंड पहुंचता है। उत्पादन कम होने से कम मात्रा में ही खाद तैयार हो सकेगी। इस घाटे की आशंका से कोई भी ठेकेदार टेंडर से बच रहा है।

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