हल्द्वानी: अवैध कब्जे के नीचे दफन हो गई ब्रिटिशकालीन नहर
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। शहर में सिंचाई विभाग की अरबों रुपए की बेशकीमती भूमि पर अवैध कब्जा है। अतिक्रमणकारियों ने दशकों पहले धीरे-धीरे शहर के बीच से गुजरने वाली ब्रिटिशकालीन मुख्य पोषक नहर का पाटकर कब्जा कर लिया। अवैध कब्जे पर पक्का निर्माण कर दुकानें बना लीं। लेकिन विभाग अतिक्रमणकारियों को चिन्हित करने और नोटिस भेजने …
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। शहर में सिंचाई विभाग की अरबों रुपए की बेशकीमती भूमि पर अवैध कब्जा है। अतिक्रमणकारियों ने दशकों पहले धीरे-धीरे शहर के बीच से गुजरने वाली ब्रिटिशकालीन मुख्य पोषक नहर का पाटकर कब्जा कर लिया। अवैध कब्जे पर पक्का निर्माण कर दुकानें बना लीं। लेकिन विभाग अतिक्रमणकारियों को चिन्हित करने और नोटिस भेजने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं कर सका।
ब्रिटिशकाल में हल्द्वानी से लालकुआं के बीच मुख्य पोषक नहर चलती थी। बाद में इस नहर को निप्रयोज्य घोषित कर दिया गया। नहर में पानी चलना भी बंद हो गया। इसके कुछ सालों बाद कुछ अतिक्रमणकारियों की नजरें इस बेशकीमती भूमि पर गढ़ गई। बंद नहर को पाटकर दुकानें बना लीं गई। इस ऐतिहासिक नहर पर तिकोनिया वर्कशॉप लाइन से लेकर मुख्य बाजार होते हुए बरेली रोड हाथीखाल तक जगह-जगह अतिक्रमण है। जगह-जगह कब्जा कर दुकानें खोलीं गई हैं। सालों बाद भी सिंचाई विभाग नहर से अवैध कब्जा नहीं हटा सका है। अभी तक अतिक्रमणकारियों को चिन्हित कर महज नोटिस भेजा गया है। अतिक्रमणकारियों से कब्जा छोड़ने को कहा गया है।
विभाग ने चिन्हित किए 345 अवैध कब्जेदार
हल्द्वानी। सिंचाई नहर ने इस नहर और आसपास की भूमि पर कब्जा करने वाले 345 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए हैं। इन्होंने नहर और आसपास की भूमि पर कब्जा कर दुकानें खोली हैं। लगभग सभी अतिक्रमणकारी नहर की शुरुआत से लेकर पांच किमी दूरी तक हैं। इससे आगे यह नहर नाले के रूप में हाथीखाल नहर में मिल जाती है।
वर्ष 1920 से शुरू हुआ था अवैध कब्जे का सिलसिला
हल्द्वानी। वर्ष 1920 में इस नहर पर पहला कब्जा हुआ था। दूसरा कब्जा वर्ष 1954 में हुआ। इसके बाद 1960 से कब्जे में तेजी आई। धीरे-धीरे अगले बीस सालों में लगभग पूरी नहर पर कब्जा कर लिया गया। इस नहर पर अंतिम कब्जा वर्ष 2000 में हुआ था।
नौ किमी लंबी और 2.60 मीटर चौड़ी है नहर
हल्द्वानी। यह ब्रिटिशकालीन नहर तिकोनिया से हाथीखाल तक नौ किमी लंबी है। जबकि चौड़ाई 2.60 मीटर है। नियमानुसार नहर के किनारों से तीन-तीन फिट तक सिंचाई विभाग की संपत्ति है। नहर के लगभग पांच किमी तक अधिकांश अवैध निर्माण हैं। इससे आगे भी अस्थाई अतिक्रमण किया गया है।
कुमाऊं में 122 नहरों पर अतिक्रमण
हल्द्वानी। पूरे कुमाऊं में सिंचाई विभाग की 122 नहरों पर अतिक्रमण किया गया है। इसमें तराई-भाबर से लेकर पहाड़ों की नहरें तक शामिल हैं। विभाग ने अतिक्रमणकारियों को चिन्हित कर नोटिस भेजे हैं। अतिक्रमणकारियों को कब्जा छोड़ने की चेतावनी दी गई है। मुख्य अभियंता कुमाऊं चंद्रशेखर जोशी का कहना है कि विभाग की संपत्ति के कब्जेदारों को हटाया जाएगा।
नहर पर पक्का अतिक्रमण करने वाले लोगों को चिन्हित किया गया है। सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजे गए हैं। प्रशासन से अनुमति लेकर पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया जाएगा। -तरुण कुमार बंसल, अधिशासी अभियंता, हल्द्वानी डिविजन
