हल्द्वानी की ये कैसी पुलिस: मानसिक विक्षिप्त को पीटती रही भीड़, देखते रहे पुलिसवाले
हल्द्वानी, अमृत विचार। रामपुर रोड में सुशीला तिवारी अस्पताल के पास बृहस्पतिवार दोपहर उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब एक विक्षिप्त व्यक्ति ने सरेराह हंगामा शुरू कर दिया। जिससे राहगीरों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की भीड़ लग गई। इस दौरान विक्षिप्त को काबू करने के लिए जमा लोगों ने …
हल्द्वानी, अमृत विचार। रामपुर रोड में सुशीला तिवारी अस्पताल के पास बृहस्पतिवार दोपहर उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब एक विक्षिप्त व्यक्ति ने सरेराह हंगामा शुरू कर दिया। जिससे राहगीरों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की भीड़ लग गई।

इस दौरान विक्षिप्त को काबू करने के लिए जमा लोगों ने इंसानियत की हदें पार कर दीं। मानसिक विक्षिप्त के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। फिर भी भीड़ ने उसे सड़क पर गिराकर दबोच लिया। और रस्सी और तार से उसके हाथ पैर बांधने शुरू कर दिए। इस दौरान विक्षिप्त व्यक्ति का माथा लहूलुहान हो गया।
हैरानी की बात यह है कि इस दौरान मौके पर मौजूद महिला एसआई समेत पुलिसकर्मियों का ध्यान सिर्फ ट्रैफिक पर था। किसी ने भी मानसिक विक्षिप्त के साथ हो रही वहशियाना करतूत का विरोध नहीं किया।

साहब वो तो विक्षिप्त था, आपने वर्दी का मान क्यों नहीं रखा
डीआईजी कुमाऊं डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने कुछ दिन पहले सुशीला तिवारी अस्पताल में पुलिस सहायता केंद्र का शुभारंभ किया था। इस दौरान डीआईजी ने पुलिसकर्मियों को जनता के लिए बेहतर पुलिसिंग देने के निर्देश दिए थे। सवाल उठता है कि क्या डीआईजी के ये निर्देश केवल सामान्य लोगों के लिए थे। क्योंकि एक मानसिक विक्षिप्त के साथ पुलिस की मौजूदगी में जो व्यवहार हुआ, उसे किसी भी नजर से सही नहीं ठहराया जा सकता। माना कि मानसिक विक्षिप्त के व्यवहार के कारण परेशानी हो रही थी लेकिन जो व्यवहार पुलिस की मौजूदगी में उसके साथ हुआ, वह भी अमर्यादित और इंसानियत के विपरीत ही था।

मानसिक विक्षिप्त को काबू करने के लिए पुलिस दूसरे तरीकों को भी अपना सकती थी लेकिन पुलिस ने भीड़ को मनमानी करने की छूट दी। अब आप ही बताइये डीआईजी साहब, बिना कपड़ों के मानसिक विक्षिप्त को सड़क पर लेटाकर पीटना कहां तक जायज है ?
