बरेली: पहले कोरोना, अब बीडीए के बुल्डोजर ने धड़ाम किया रीयल एस्टेट
बरेली, अमृत विचार। लंबे समय से कोरोना संकट झेलने के बाद दिवाली सीजन पर भी रीयल एस्टेट का बिजनेस बूम नहीं पकड़ रहा है। शहर में बड़े बिल्डरों की करीब दर्जनभर आवासीय कॉलोनियों में आवास व भूखंड खरीदने के लिए ग्राहकों का अभी टोटा है। हालांकि कोरोना काल की दूसरी लहर के काफी समय बाद …
बरेली, अमृत विचार। लंबे समय से कोरोना संकट झेलने के बाद दिवाली सीजन पर भी रीयल एस्टेट का बिजनेस बूम नहीं पकड़ रहा है। शहर में बड़े बिल्डरों की करीब दर्जनभर आवासीय कॉलोनियों में आवास व भूखंड खरीदने के लिए ग्राहकों का अभी टोटा है। हालांकि कोरोना काल की दूसरी लहर के काफी समय बाद तक लोग भारी-भरकम इलाज के डर के चलते आवास व भूखंडों को नहीं खरीद रहे थे लेकिन अब इसका इसका भी खौफ लगभग खत्म हो चुका है लेकिन अब भी रियल एस्टेट के मार्केट में उछाल नहीं दिखाई दे रहा है।
बिल्डरों का कहना है कि बरेली विकास प्राधिकरण यानी बीडीए ने अवैध कॉलोनियों पर दो महीने के दौरान अधाधुंध कार्रवाई के बाद से लोग अब बीडीए से स्वीकृत कॉलोनियों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि इनके प्लॉट महंगे होने की वजह से सामान्य आमदनी वाले बड़ी संख्या में परिवार मकानों की खरीद की प्लानिंग पर ब्रेक लगा दिया है। इससे निजी बिल्डरों की कई अरब की कॉलानियों की रकम फंस गई है।
रीयल एस्टेट से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे अधिक प्रभावित मध्य और छोटे स्तर पर काम करने वाले विकासकर्ता हैं जो कि कम बजट में आशियाना बनाने के लिए प्रोजेक्ट करते हैं। खासतौर पर इसमें मध्य वर्ग या इससे निचले वर्ग के परिवार अपने भूखंड खरीदकर निर्माण कराते हैं। कुछ बना मकान भी खरीदते हैं। हालांकि आर्थिक संकट के चलते ऐसे परिवार कोरोना जैसी मुश्किल की घड़ी में परिजनों के इलाज के लिए जरूरी फंड अपने पास खर्च के लिए रखना चाहते थे।
हालांकि, कोरोना की दूसरी लहर के बाद हालात अब कुछ सामान्य दिख रहे हैं। इसलिए दिवाली और धनतरेस के अवसर पर आशियाने की मांग बढ़ने के साथ रीयल एस्टेट कारोबार में भी बूम आने की उम्मीद थी। दिवाली का सीजन कुछ समय बाद से शुरू होने जा रहा है लेकिन अब तक रियल एस्टेट के बूम न पकड़ने से कॉलोनाइजरों के कई अरब के प्रोजेक्ट फिर से फंसते दिखाई दे रहे हैं।
कॉलोनाइजरों का कहना है कि अभी मिनी बाईपास, नैनीताल रोड, करगैना सहित दूसरी जगहों पर बीडीए ने बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया है। इस वजह से आम ग्राहक में डर की वजह से वे अब बीडीए से स्वीकृत न होने वाली कॉलोनियों में जाने से डर रहे हैं। रामगंगानगर में आवासीय भूखंड महंगे होने से उनकी जेबें परमीशन नहीं दे पा रही हैं।
बीडीए से अनुमति लेने में बेलने पड़ रहे पापड़
पीलीभीत बाईपास, नैनीताल रोड, मिनी बाईपास रोड, बदायूं रोड,नकटिया सहित दूसरी जगहों पर कॉलोनियों के प्रोजेक्टों में भूखंड नहीं बिक पा रहे हैं। बिल्डर अपने खर्च निकालने के लिए संपर्क में आने वाले ग्राहकों से मोलभाव भी करने को तैयार हैं। इसके बाद भी खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। एक बिल्डर का कहना है कि शहर में नई टाउनशिप नहीं लाई जा पा रही है। इसका बड़ा कारण यह है कि बीडीए में ले-आउट और नक्शा पास कराने में पेंच फंसाए जा रहे हैं। ऐसे में तमाम बिल्डरों ने अपनी परियोजनाओं को वापस भी ले लिया है।
25 से 40 लाख तक के आवासों की ज्यादा मांग
कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम करने वाले बड़ी संख्या में लोगों को अब मकानों की जरूरत समझ में आ गई है। इसमें ज्यादातर लोग निम्न मध्यमवर्गीय परिवार के हैं। इसलिए वह अपना आशियाना ढूंढ रहे हैं लेकिन उसका बजट 25 से 40 लाख रुपये तक के बीच है। ऐसे में बड़े बिल्डर भी इस बजट के आवासों को बनाने में अब खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आज से छह-सात साल पहले रीयल एस्टेट बिजनेस की जो धमक-चमक थी, वह लौटकर अब वापस नहीं आ पा रही है। कोरोना में यह कारोबार चौपट हो गया था। उसके बाद से स्थिति खराब बनी हुई है। -रमनदीप सिंह, अध्यक्ष, क्रेडाई
पीलीभीत बाईपास पर मेरा भी एक आवासीय प्रोजेक्ट चल रहा है। कोरोना काल में बिजनेस ठप ही था, उसके बाद से स्थिति ऐसी ही बनी हुई है। पितृपक्ष के बाद नवरात्र में कारोबार के उठने की उम्मीद है। -पीयूष अग्रवाल, संस्थापक सदस्य, क्रेडाई
अब लोग कम बजट वाले आवासों को पसंद कर रहे हैं। इसमें निम्न मध्यमवर्गीय परिवार शामिल है। हालांकि अभी इन आवासों की मांग में कोई बढ़ोत्तरी नहीं दिखाई दे रही है। -विष्णु अग्रवाल, बिल्डर
