हल्द्वानी: काॅलोनियों की सड़कों पर गड्ढों का जाल, ये है वार्ड 45 का हाल

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हल्द्वानी, अमृत विचार। कुसुमखेड़ा की अधिकांश काॅलोनियों की सड़कों पर गड्ढों का जाल है। यह जाल इस वार्ड की अधिकांश कालोनियों में देखा जा सकता है। सड़कें इतनी खराब हैं कि जरा भी असावधानी बरतीं, समझों मुसीबत आई सामने। सालों से इस दुश्वारी के साथ हजारों की संख्या में लोग अच्छे दिन का इंतजार कर …

हल्द्वानी, अमृत विचार। कुसुमखेड़ा की अधिकांश काॅलोनियों की सड़कों पर गड्ढों का जाल है। यह जाल इस वार्ड की अधिकांश कालोनियों में देखा जा सकता है। सड़कें इतनी खराब हैं कि जरा भी असावधानी बरतीं, समझों मुसीबत आई सामने।

सालों से इस दुश्वारी के साथ हजारों की संख्या में लोग अच्छे दिन का इंतजार कर रहे हैं। ग्राम पंचायत से शहर में आने के बाद इन्होंने निगम से भी उम्मीदें लगाईं, लेकिन फिलाहल उन्हें ये विभाग भी अपनी जिम्मेदारियों पर खरा नहीं उतर सका है।

अमृत विचार की टीम ने गुरुवार को जब वार्ड संख्या 45 की पड़ताल की तो एक बड़ी समस्या के रूप में काॅलोनियों की सड़कों का हाल सामने आया। हालांकि गैस गोदाम रोड का निर्माण होने से मुख्य सड़क पर सफर से तो लोगों को परेशानी नहीं थी। लेकिन इस सड़क के कालोनी से अधिक ऊंचे होने और फिर बरसाती पानी का कालोनियों की रोडों पर भर जाने की समस्या को लोग कहते दिखे।

बड़ी समस्या सड़कों पर गड्ढे थे। कुसुमखेड़ा और कोहली काॅलोनी के अंतर्गत करीब चालीस कालोनी आती हैं, जहां बारह से तेरह हजार की आबादी निवास करती बताई जाती है। इस आबादी का एक बड़ा हिस्सा हर रोज नगर निगम की इस अनदेखी से होने वाली समस्याओं का सामना करती है।

रकसिया नाला बना कूड़ा डंपिंग जोन
इस वार्ड के पास से गुजरने वाला रकसिया नाला डंपिंग जोन बन चुका है। वार्ड की अधिकांश काॅलोनियों के लोग इस नाले को कूड़ा घर की तरह इस्तेमाल करते हैं। कचरा फेंकते हैं और घरों से निकलने वाले गंदे पानी को भी इसी में छोड़ देते हैं। इस समस्या का सामना सरस्वती विहार, तिलक नगर फेज वन-टू, विकास नगर पूर्वी आदि कालोनी के लोगों को करना पड़ता है, लेकिन इस मामले को लेकर संबंधित विभागों की ओर से कोई पहल नहीं की जाती है।

शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं लोग
नगर निगम के स्ट्रीट लाइटों के लगाने के महा अभियान का असर कुसुमखेड़ा कोहली कालोनी में कहीं नजर नहीं आया। लोगों से बात की तो पता चला कि क्षेत्र में शाम होते ही घरों में कैद होना पड़ता है। अंधेरे के डर के कारण बाहर कम ही और जरूरत पड़ने पर ही निकलते हैं। अंधेरे के कारण कई बार चोरी जैसी वारदातें भी हुई हैं। किसी की बाइक तो किसी के घर के ताले टूट गए।

नई लाइनों में भी ठीक से नहीं दौड़ सका पानी
कुसुमखेड़ा कोहली कालोनी में पानी संकट से लोग बेहाल रहते थे। सालों पुरानी खस्ताहाल हो चुकी पेयजल लाइनों से उन्हें जरूरत भर भी पानी नहीं मिल पाता था। कभी लाइटों से निकलने वाला पानी गंदा होता था तो कभी चोक और लीकेज के कारण कई कई दिन सूखा पड़ जाता था। लोग परेशान हुए और लामबंद भी तो जिम्मेदारों की नींद टूटी। सरकारी योजना के तहत नई लाइनों को बिछाया गया। इन लाइनों को बिछाने के बाद भी अभी इसमें ठीक से पानी दौड़ नहीं सका है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी।

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