हल्द्वानी: जिले में 35 हजार मीट्रिक टन धान की फसल खतरे में

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हल्द्वानी, अमृत विचार। मानसून की अच्छी बारिश होने की वजह से इस बार किसानों को धान की अच्छी फसल की उम्मीद थी तो वहीं धान कटाई के दौरान हो रही बारिश से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इससे किसानों में मायूसी है। खेतों में कई जगह धान की पकी फसल तैयार खड़ी है तो …

हल्द्वानी, अमृत विचार। मानसून की अच्छी बारिश होने की वजह से इस बार किसानों को धान की अच्छी फसल की उम्मीद थी तो वहीं धान कटाई के दौरान हो रही बारिश से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इससे किसानों में मायूसी है। खेतों में कई जगह धान की पकी फसल तैयार खड़ी है तो कुछ स्थानों पर फसल कटकर खेतों में पड़ी है। मौसम विभाग ने दो दिनों तक मूसलाधार बारिश होने का अनुमान जताया है। रविवार से बारिश का दौर भी शुरू हो गया है।

जिले के भाबर और मैदानी इलाके में धान की अच्छी फसल होती है।धान की फसल अब कटने को तैयार है। अच्छी फसल के उत्पादन से किसानों को अच्छी कमाई का आसरा रहा था। लेकिन बारिश की वजह से ऐसा होता नहीं दिख रहा है। गौालपार के किसान नीरज रैक्वार ने बताया कि किसान की साल भर की फसल पर पानी फिरता दिख रहा है। इधर गोपाल सिंह गैड़ा का कहना है कि कोरोना की वजह से पहले से ही किसान मंदी का सामना कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर ये बेमौसम बारिश फसल को खराब कर रही है। इधर कृषि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जिले के मुख्य कृषि अधिकारी विकेश यादव ने बताया कि विभाग स्थिति का जायजा ले रहा है।

35 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा उत्पादन
नैनीताल जिले में 10974 हेक्टेयर में प्रत्येक साल करीब 35157 मीट्रिक टन धान का उत्पादन होता है। जिले के लालकुआं, चोरगलिया, हल्दूचौड़, मोटाहल्दू, कोटाबाग, रामनगर, छोई, बैलपड़ाव आदि इलाकों में बड़े पैमाने पर किसान धान रोपते हैं। साथ ही पहाड़ के उन स्थानों में जहां सिंचाई के साधन हैं वहां भी धान की पैदावार होती है।

जो फसल पक गई उसका नुकसान कम होगा। लेकिन जिन फसलों में दाने आ गए हैं उनको नुकसान ज्यादा होगा। हवा चलने की वजह से फसल नीचे जमीन पर गिर जाएगी।- विकेश यादव, मुख्य कृषि अधिकारी, नैनीताल

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