उत्तराखंड में कोरोनाकाल में दोगुना हो गया आत्महत्या का ग्राफ, आंकड़े चौकाने वाले

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नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। हिमालयी राज्य उत्तराखंड में आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोनाकाल में आत्महत्या करने वालों का ग्राफ और भी तेजी के साथ बढ़ रहा है। हालत यह है कि करीब एक करोड़ की आबादी वाला यह राज्य आत्महत्या के मामलों में कई बड़ी आबादी वाले राज्यों से भी आगे है। यह …

नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। हिमालयी राज्य उत्तराखंड में आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोनाकाल में आत्महत्या करने वालों का ग्राफ और भी तेजी के साथ बढ़ रहा है। हालत यह है कि करीब एक करोड़ की आबादी वाला यह राज्य आत्महत्या के मामलों में कई बड़ी आबादी वाले राज्यों से भी आगे है। यह आंकड़ा काफी परेशान करने वाला है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार उत्तराखंड में साल 2020 में 943 लोगों ने आत्महत्या की है। कोरोना की शुरूआत भी इसी साल से हुई थी और लोगों को कोरोना के साथ ही अन्य समस्याओं से भी जूझना पड़ा। इस दौरान बेरोजगारी की दर बढ़ गई जिससे अन्य सामाजिक परेशानियों से भी लोगों को दो चार होना पड़ा।

यह आंकड़ा इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पिछले कुछ सालों की अपेक्षा आत्महत्या के मामलों में करीब दोगुना उछाल आया है। उत्तराखंड में साल 2018 में 421 लोगों ने अपना जीवन खुद से ही समाप्त कर लिया था। 2019 में यह मामले और भी बढ़ गए। साल 2019 में 516 लोगों ने आत्महत्या की। साल 2018 और 2019 में जहां कुल 937 लोगों ने आत्महत्या की तो वहीं साल 2020 में इससे भी ज्यादा लोगों ने अपना जीवन समाप्त कर लिया।

किसानों से आत्महत्या के मामले में शून्य
किसान आत्महत्या के मामले में उत्तराखंड में स्थिति शून्य है। यहां किसान आत्महत्या का कोई मामला सामने नहीं आया है।

प्रति लाख 8.3 लाख लोग कर रहे हैं आत्महत्या
राज्य में प्रति एक लाख की आबादी पर 8.3 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। दूसरी ओर यूपी में यह आंकड़ा 2.1, बिहार में 0.7, झारखंड में 5.6, राजस्थान में 7.20 प्रतिशत है।

हिमालयी राज्यों में दूसरे नंबर पर
हिमालयी राज्यों में आत्महत्या के मामले में उत्तराखंड दूसरे नंबर पर हैं। हिमालयी राज्यों में सबसे ज्यादा 3243 आत्महत्या आसाम में हुई हैं। हिमाचल में 857, त्रिपुरा में 845 ने आत्महत्या की हैं।

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