हल्द्वानी: खजाना नहीं भर पा रहे नगर निगम के अधिकारी
हल्द्वानी, अमृत विचार। विकास कार्यों को लेकर बजट का रोना रोने वाली नगर निगम के अधिकारी कर वसूली में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। साल खत्म होने को है और अब तक लक्ष्य का केवल 60 फीसदी ही पा सके हैं। चुनावी बिगुल भी जल्द बजने को है। इस माहौल के बीच वसूली का लक्ष्य …
हल्द्वानी, अमृत विचार। विकास कार्यों को लेकर बजट का रोना रोने वाली नगर निगम के अधिकारी कर वसूली में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। साल खत्म होने को है और अब तक लक्ष्य का केवल 60 फीसदी ही पा सके हैं। चुनावी बिगुल भी जल्द बजने को है। इस माहौल के बीच वसूली का लक्ष्य कर पाना और चुनौती पूर्ण होगा। जानकारों के अनुसार यह स्थिति शहर के विकास को प्रभावित कर सकती है।
शहर के विकास में नगर निगम की आय महत्वपूर्ण स्थान रखती है। पुलिया निर्माण से लेकर सड़क के गड्ढे भरने तक और संसाधनों को जुटाने के लिए निगम अपनी कमाई से व्यवस्थाएं करता है। आपातकालीन समस्याओं पर फौरन कार्य किए जाने में भी यह निधि उपयोगी होती है लेकिन इस साल इस खजाने को भरने में निगम के अधिकारी कुछ ज्यादा खास नहीं कर सके हैं। लगभग 40 फीसदी लक्ष्य से पीछे हैं। जबकि दुकानों का किराया वसूली में भी इतनी ही सफलता पा पाए हैं।
निगम को इनसे मिलता है कर
भवन – 25 हजार (लगभग)
दुकानें – 1213
पिछले साल के मुकाबले स्वच्छता कर में भी पिछड़े
नगर निगम स्वच्छता कर में भी पिछले साल के मुकाबले पिछड़ा है। पिछले साल निगम को एक करोड़ 44 लाख रुपये का लक्ष्य मिला था। 27 नए वार्डों से निगम कोई कर नहीं वसूलता है। 33 वार्डों के करीब 33 हजार घर बताए जाते हैं, जहां से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने पर निगम को कर मिलता है। यहां से एक करोड़ 20 लाख रुपये की वसूली की गई थी। इस बाद निगम की वसूली पिछले साल से कम बताई जाती है। इसका बड़ा कारण लोगों द्वारा शुल्क जमा नहीं करना है। लोगों की समस्याएं सुनकर उनके समाधान का आश्वासन देकर अधिकारी कर वसूली में सुधार करने का प्रयास कर रहे हैं।
भवन और स्वच्छता कर वसूली को लेकर लोगों से मिला जा रहा है। लक्ष्य को जल्द पूरा किया जा सके, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों से भी अपील की गई है कि वे जागरुक होकर सहयोग करें।-पंकज उपाध्याय, नगर आयुक्त
