हल्द्वानी: भवन न स्टाफ… और महाविद्यालय में प्रवेश हो गए शुरू

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वनी, अमृत विचार। चुनावी साल में सरकार ने गौलापार में सरकारी महाविद्यालय की घोषणा कर प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कर दी, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के नाम पर अभी काम सिफर ही है। भाजपा के एक नेता की कृपा से भवन तो मिल गया, लेकिन इसके बाहर फ्लैक्सी लगाने के सिवाय सरकार कोई काम नहीं कर …

हल्द्वनी, अमृत विचार। चुनावी साल में सरकार ने गौलापार में सरकारी महाविद्यालय की घोषणा कर प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कर दी, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के नाम पर अभी काम सिफर ही है। भाजपा के एक नेता की कृपा से भवन तो मिल गया, लेकिन इसके बाहर फ्लैक्सी लगाने के सिवाय सरकार कोई काम नहीं कर सकी।

हालात ये हैं कि जिस भवन में महाविद्यालय संचालित होना बताया जा रहा है, उसके कमरों में किराएदार रह रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि महाविद्यालय का यह भवन गौलापार में धरातल पर कब तक उतर सकेगा।

एमबीपीजी कालेज में विद्यार्थियों की भीड़ को देखते हुए सरकार ने गौलापार में सरकारी महाविद्यालय खोलने की घोषणा की। आनन-फानन में सरकार ने महाविद्यालय के प्राचार्य के तौर पर डा. संजय कुमार की नियुक्ति कर घोषणा को लेकर अमलीजामा पहनाने का दावा भी कर दिया। दीपावली की छुट्टी के बाद से ऑफलाइन प्रक्रिया भी शुरू कर दी। शुक्रवार तक 60 विद्यार्थियों को प्रवेश भी दे दिया गया।

इन विद्यार्थियों की पढ़ाई कहां होगी, ये एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। गौलापार के किशनपुर में जिस भवन का चयन किया गया है, उस भवन के बाहर एक फ्लैक्सी के सिवाय कुछ हुआ ही नहीं है। इस भवन के सात में से ज्यादातर कमरों में किराएदार रह रहे हैं। बरामदे में मधुमक्खी पालन के डिब्बे रखे हुए हैं। इस भवन में कॉलेज कब से चालू होगा, इसको लेकर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

प्राचार्य को छोड़ कोई नियुक्ति नहीं
गौलापार मे राजकीय महाविद्यालय खोलने को लेकर सरकार कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में है। कॉलेज का लोगो भी तैयार कर दिया गया। प्राचार्य को छोड़कर किसी भी पद पर कोई नियुक्ति नहीं की गई है। ना ही बजट की व्यवस्था की गई है। यहां पर बड़ा सवाल ये है कि जब कुछ भी नहीं हुआ है तो सरकार ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की तैयारी क्यों शुरू कर दी है।

भटक रहे हैं अभिभावक व विद्यार्थी
प्रस्तावित भवन के बाहर महाविद्यालय का फ्लैक्सी लगा दिया गया है। उस पर भी प्रवेश के लिए दो नंबर चस्पा कर उन पर संपर्क करने को कहा गया है। अभिभावक व विद्यार्थी मौके पर आकर इधर-उधर भटक रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि मोबाइल नंबर पर कॉल की जाए तो वह उठ नहीं रहा है। किशनपुर नई आबादी जसपुर खोलिया बांगर निवासी त्रिलोक सिंह भी अपनी पुत्री के प्रवेश के लिए शुक्रवार को प्रस्तावित भवन पहुंचे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। त्रिलोक का कहना है कि वे पिछले तीन दिन से यहां पर आ रहे हैं।

उधार पर चल रहा है फिलहाल काम
गौलापार सरकारी महाविद्यालय के लिए प्राचार्य का पद स्वीकृत करने के अलावा अभी सरकार की ओर से कुछ नहीं हुआ है। प्राचार्य के लिए एमबीपीजी कालेज में एक कक्ष आवंटित किया गया है। साथ ही एमबीपीजी कालेज प्राचार्य ने फिलहाल 50 हजार रुपये का चेक रोजमर्रा के खर्च के लिए दिया। प्रवेश प्रक्रिया के लिए भी लिपिक संवर्ग के कर्मचारी अस्थायी तौर पर एमबीपीजी कालेज से ही दिए गए हैं।

गौलापार महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर स्वीकृत सीटें

विज्ञान वर्ग- 160
वाणिज्य वर्ग- 80
कला वर्ग- 240

अभी हमारा अनुबंध ही नहीं हुआ-गणेश
गौलापार में सरकारी महाविद्यालय के लिए जिस भवन का चयन किया गया है, उस भवन में कुछ वक्त पहले तक एक निजी स्कूल चलता था। भवन स्वामी गणेश सुयाल का कहना है कि विधायक नवीन दुम्का की पहल पर उन्होंने भवन को किराए पर देने के लिए मौखिक सहमति दी है।

मौखिक तौर पर 11 महीने के अनुबंध की बात हुई। अभी तक विभाग की ओर से अनुबंध की कोई पहल नहीं की गई है। हम भवन देने को तैयार हैं लेकिन भवन कब से लेना है, यह उच्च शिक्षा विभाग को तय करना है। विभाग की ओर से जैसे ही अनुबंध किया जाएगा। हम उन्हें भवन हस्तांतरित कर देंगे।

हमारे क्षेत्र में महाविद्यालय खुल रहा है। ये क्षेत्र के लिए बहुत ही सुखद है। इस क्षेत्र के युवाओं को पढ़ाई के लिए अब हल्द्वानी नहीं जाना होगा।- जगदीश सुयाल

हमारे क्षेत्र में महाविद्यालय खुलना गर्व की बात है। इसको लेकर सरकार को धन्यवाद, लेकिन इसे जल्द से जल्द शुरू किया जाए। हम लोग आशान्वित हैं।-सुरेश चंद्र

मैंने अपनी परास्नातक की पढ़ाई हल्द्वानी कालेज से की। मुझे खुशी है कि अब इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को हल्द्वानी की दौड़ भाग नहीं करनी पड़ेगी।-रोहित कोटलिया

गौलापार एक शिक्षा हब के रूप में उभर रहा है। अब सरकार ने भी इस पर मुहर लगा दी है। महाविद्यालय खुलने से क्षेत्र का विकास तेजी से होगा।- ललिता जोशी

नए कालेज के लिए ये हैं मानक
1- कम से कम 5 बीघा जमीन होनी चाहिए
2- खेल मैदान के लिए ओपन ग्राउंड स्पेस, अन्य गतिविधियों के लिए 500 स्क्वायर मीटर जमीन हो
3- कॉलेज के पास कंप्यूटर लैब हो जिसमें कम से कम 30 कंप्यूटर हों
4- अन लिमिटेड ब्रॉडबैंड की सुविधा होनी चाहिए
5- कॉलेज प्रशासन के पास लाइब्रेरी
6- यूजीसी नियमों के तहत टीचिंग स्टाफ हो

नए कालेज के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। बजट व दूसरे संसाधनों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द 17 प्राध्यापकों की नियुक्ति हो जाएगी और बजट स्वीकृत होगा। – पीके पाठक, उच्च शिक्षा निदेशक

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