नैनीताल: मासूम को मारने के 36 घंटे बाद मादा तेंदुआ पिंजड़े में कैद

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Edited By Amrit Vichar
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ज्योलीकोट, अमृत विचार। पांच साल की मासूम बच्ची को मारने के 36 घंटे बाद चोपड़ा दांगड़ गांव में लगे पिंजड़े में तेंदुए कैद हो गया है। वन विभाग ने तेंदुए को रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। साथ ही पकड़ा गया तेंदुआ आदमखोर है या नहीं इसका पता लगाने के लिए लार के नमूने जांच …

ज्योलीकोट, अमृत विचार। पांच साल की मासूम बच्ची को मारने के 36 घंटे बाद चोपड़ा दांगड़ गांव में लगे पिंजड़े में तेंदुए कैद हो गया है। वन विभाग ने तेंदुए को रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। साथ ही पकड़ा गया तेंदुआ आदमखोर है या नहीं इसका पता लगाने के लिए लार के नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

ज्योलीकोट के चोपड़ा दांगड़ गांव में मंगलवार की शाम को घर में खेल रही पांच साल की मासूम राखी जीना को तेंदुआ उठा कर ले गया था। ग्रामीणों के शोर मचाने पर तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया था। बाद में घर से कुछ दूरी पर खेतों घायल हालत में पड़ी मिली थी। परिजन उसको हल्द्वानी के निजी अस्पताल लेकर आए थे जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इधर बुधवार को परिजनों ने हंगामा काटा था। उन्होंने तेंदुए को आदमखोर घोषित करने की मांग पर अड़ गए थे।

इसके बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए मंगलवार की रात को ही दांगड़ गांव में पिंजड़ा लगाया था। इधर, पिंजड़ा लगाने के करीब 36 घंटे बाद गांव में लगे पिंजड़े में तेंदुआ फंस गया। पिंजड़े में फंसा तेंदुआ मादा और उम्र तकरीनब साढ़े चार साल है। फिलहाल तेंदुए को रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। अब उसकी लार के सैंपल को जांच के लिए देहरादून भेजा जा रहा है ताकि पता चल सके कि पकड़ा गया तेंदुआ आदमखोर है या नहीं।

आदमखोर की तलाश में घूम रहे शिकारी 

ज्योलीकोट में आदमखोर तेंदुए को निशाना बनाने के लिए पिथौरागढ़ के शिकारी हरीश धामी को नियुक्त किया गया है। शिकारी धामी वन टीम के साथ  ज्योलीकोट के आसपास वाले जंगलों में आदमखोर की तलाश में घूम रहे हैं।

फिर से लगाया गया पिंजड़ा 

वन विभाग ने पिंजड़े में तेंदुए के कैद होने के बाद फिर से दांगड़ में पिंजड़ा लगा दिया है। आशंका है कि ज्योलीकोट चोपड़ा ग्राम सभा में कई तेंदुए हैं जो आसान शिकार की तलाश में आबादी की ओर रुख कर रहे हैं।

तेंदुआ को रेस्क्यू सेंटर रानीबाग भेजा जा रहा है। जिसके लार के सैंपल लेकर परीक्षण को देहरादून भेजे जाएंगे। परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आदमखोर है अथवा नहीं। परीक्षण रिपोर्ट आने तक शिकारी क्षेत्र में नियुक्त रहेंगे। जो कि वन कर्मियों के साथ गश्त करते रहेंगे।- भूपाल सिंह मेहता, रेंजर मनोरा वन रेंज, नैनीताल वन डिवीजन

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