हल्द्वानी: आईआईटी रुड़की में तैयार होगा गौलापार नहर का डिजाइन
यतीश शर्मा, हल्द्वानी। आपदा में क्षतिग्रस्त हुई गौलापार नहर का डिजाइन आईआईटी रुड़की में तैयार होगा। नहर के पुनरुद्धार में करीब ढाई करोड़ रुपए की धनराशि खर्च होगी। इसी तरह समानांतर नहर के निर्माण में भी ढाई करोड़ रुपए के करीब का खर्चा आएग। सिंचाई विभाग ने बजट के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा। डीएम …
यतीश शर्मा, हल्द्वानी। आपदा में क्षतिग्रस्त हुई गौलापार नहर का डिजाइन आईआईटी रुड़की में तैयार होगा। नहर के पुनरुद्धार में करीब ढाई करोड़ रुपए की धनराशि खर्च होगी। इसी तरह समानांतर नहर के निर्माण में भी ढाई करोड़ रुपए के करीब का खर्चा आएग। सिंचाई विभाग ने बजट के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा। डीएम ने बजट के लिए सचिव को प्रस्ताव भेज दिया है।
आपदा के जख्म अभी भरने के नाम नहीं ले रहे हैं। गौलापार नहर के निर्माण में लंबा समय लग सकता है। सिंचाई विभाग के गौलापार नहर व सामांतर नहर के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपए के करीब की आवश्यकता है। बजट के अभाव में सिंचाई विभाग हाथ पर हाथ रखे बैठा हुआ है। वह केवल कागजी कार्यवाही करने में लगा है। विभाग की तैयारी है कि बजट मिलते ही आईआईटी रुड़की से इसका डिजाइन तैयार कराया जाएगा। साथ ही नहर पुन: क्षतिग्रस्त न हो इसके लिए ब्रिज की तर्ज पर नहर का पुनरुद्धार कराया जाएगा।
गौलापार नहर के लिए 214.73 लाख तथा गौलापार समांतर नगर के लिए 250.12 लाख रुपए का बजट चाहिए। आपदा के दौरान गौलापार नहर 65 मीटर के करीब क्षतिग्रस्त हो गई है। पुनरुद्धार के लिए नौ मीटर की दीवार बनेगी। इसी तरह गौलापार समानंतर नहर 80 मीटर क्षतिग्रस्त हुई है। किसानों की मांग पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई, लेकिन वह पानी के तेज बहाव के कारण विफल हो गई। आरबी सिंह, अधीक्षण अभियता, सिंचाई विभाग
ये आ रहीं हैं दिक्कतें
गौलापार में क्षतिग्रस्त नहर को पिछले दिनों ठीक करने का काम किया गया था, लेकिन वह विफल रहा। भूमिगत नहर के बड़े लीकेज वाले हिस्से में लीकेज को रोकने के लिए दीवार बनाई गई थी। दीवार बनाने के बाद नहर में पानी का बहाव छोड़ा गया था लेकिन बहाव के साथ ही दीवार बह गई। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी समझ गए कि इस नहर को ठीक करने के लिए बड़े स्तर पर कार्य योजना की जरूरत है। इसके बाद आईआईटी से डिजायन बनाने का उपाय किया गया।
45 गांव के लोगों को अभी और करना होगा इंतजार
हल्द्वानी। गौलापार नहर से सिंचाई की आश लगाकर बैठे किसानों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। 19 अक्टूबर को भारी बारिश के चलते यह नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस नहर से 45 गांव के काश्तकारों को पानी मिलता है। जिससे वह कृषि और पशुपालन करते हैं।सिंचाई विभाग बजट के अभाव में मूकदर्शक बना बैठा है। विभागीय अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था भी की, लेकिन नहर के पानी के तेज बहाव के आगे उनकी एक न चली और वैकल्पिक व्यवस्था ढह गई। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए।
सिंचाई नहर ठीक नहीं हुई, ग्रामीण करेंगे भूख हड़ताल
गौलापार में सिंचाई नहर के अभी तक ठीक नहीं होने पर गौलापार के ग्रामीण अब आंदोलन को और भी तेज करने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व बीडीसी मेंबर अर्जुन सिंह बिष्ट ने बताया कि वह एक दिसंबर से इस नहर को ठीक कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू करेंगे। कहा कि उनके साथ प्रभावित किसान भी होंगे। कहा कि भूख हड़ताल के दौरान किसी भी किसान के साथ किसी तरह की कोई अनहोनी होती है इसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।
