लखनऊ: फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का हुआ आयोजन, 7 दिसंबर तक चलेगा अभियान
लखनऊ। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नगर निगम मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित बैठक में डिप्टी सीएमओ एके त्रिपाठी ने महापौर संयुक्ता भाटिया को फाइलेरिया की दवा खिलायी। इस अवसर पर क्षेत्रीय पार्षदों को बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण की जानकारी दी गयी। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि 22 नवम्बर से 7 दिसम्बर तक फाइलेरिया …
लखनऊ। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नगर निगम मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित बैठक में डिप्टी सीएमओ एके त्रिपाठी ने महापौर संयुक्ता भाटिया को फाइलेरिया की दवा खिलायी। इस अवसर पर क्षेत्रीय पार्षदों को बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण की जानकारी दी गयी।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि 22 नवम्बर से 7 दिसम्बर तक फाइलेरिया मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। विश्व में इस बीमारी के 40 प्रतिशत मरीज भारत में हैं। देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 272 जिले फाइलेरिया के लिए एंडेमिक माने गए हैं। इसमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। भारत में लगभग 60 करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों पर फाइलेरिया का खतरा है।
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी एसके रावत ने बताया कि फाइलेरिया से हाथ व पांव फूलने और हाइड्रोसील जैसी समस्या हो जाती है। कुछ प्रकरण में दूधिया पेशाब होता है जिसका कोई उपचार नहीं है। यह बीमारी जीवन में एक बार हो जाने पर लक्षण वापस नहीं होते हैं।
मच्छर के काटने से फैलती है बीमारी
डिप्टी सीएमओ ने बताया कि लिम्फैटिक फाइलेरिया या फाइलेरिया एक परजीवी जनित रोग है। भारत में यह रोग मुख्यतः दो परजीवियों के कारण होता है। वुचरेरीआ बेन्क्रोफटाई और ब्रुजिया मलाई। ये परजीवी मच्छरों द्वारा मनुष्य के शरीर में पहुंचते हैं। भारत में क्यूलेक्स क्विनकीफासिएटस और मानसोनिआ प्रजाति के मच्छर इस रोग के परजीवियों के मुख्य वाहक हैं। यह एक घरेलु मच्छर है जो कि आमतौर पर गंदे पानी में आबादी के आस पास पनपता है। गंदा पानी न मिलने पर साफ पानी में भी पनप सकता है। इसलिए क्षेत्र में कहीं भी पानी का ठहराव न हो तथा मच्छरो को पनपने न दिया जाय।
