सीतापुर: अपना दल की विजय हुंकार यात्रा के तहत बैठक संपन्न

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

सीतापुर। अपना दल एस की विजय हुंकार यात्रा को लेकर पार्टी के युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्य अतिथि विजय चौरसिया की मौजूदगी में एक बैठक आयोजित की गई। अपना दल एस के जिलाध्यक्ष जयप्रकाश पटेल ने बताया कि बैठक में कई सक्रिय सदस्यों को मुख्य अतिथि ने पदों को लेकर नियुक्ति पत्र दिया …

सीतापुर। अपना दल एस की विजय हुंकार यात्रा को लेकर पार्टी के युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्य अतिथि विजय चौरसिया की मौजूदगी में एक बैठक आयोजित की गई। अपना दल एस के जिलाध्यक्ष जयप्रकाश पटेल ने बताया कि बैठक में कई सक्रिय सदस्यों को मुख्य अतिथि ने पदों को लेकर नियुक्ति पत्र दिया है।

बैठक में संगठन के विस्तार व पार्टी के उद्देश्यों पर चर्चा की गई। बैठक में विशिष्ट अतिथि प्रदेश सचिव आईटी मंच आशीष सिंह, जिला अध्यक्ष छात्र मंच कानपुर इंद्र अवस्थी, प्रदेश महा सचिव किसान मंच ताराचन्द्र पटेल, जिला अध्यक्ष शिक्षक मंच रामसिंह वर्मा, जिला अध्यक्ष महिला मंच पूजा सिंह वर्मा, जिला उपाध्यक्ष प्रेमचंद वर्मा, जिला उपाध्यक्ष महिला मंच शोभा लोधी, जिला उपाध्यक्ष शिक्षक मंच संदीप यादव, जिला उपाध्यक्ष व्यापार मंच धर्मेंद्र मिश्रा, विधानसभा अध्यक्ष नगर राजू राजवंशी, विधानसभा अध्यक्ष सेवता कालिका प्रसाद पटेल, विधानसभा अध्यक्ष बिसवां राम नरेश वर्मा, मिश्रीलाल वर्मा, विश्वास कुमार पटेल, आलोक, निर्मल कुमार मौर्य, सरोज कुमार वर्मा, अजय कुमार पटेल, सुरेश प्रकाश वर्मा आदि मौजूद रहे। बैठक का संचालन जिला उपाध्यक्ष ओम प्रकाश पटेल ने किया।

धनुष यज्ञ का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए भक्त

थाना क्षेत्र के ग्राम हरीपुर क्योटाना पोस्ट बोहरा गांव के चल रही पांच दिवसीय श्री राम कथा महायज्ञ के तीसरे दिन कथावाचिका रुची सिंह यादव ने श्रीराम और जानकी के मिलन के अद्भुत प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि धनुष यज्ञ के लिए रखे गए भगवान शिव के पिनाक धनुष के भार और बल को देखते हुए जानकी द्वारा माता पार्वती से प्रार्थना करना, बिरह और मिलन की उत्कंठा, प्रेम और आदर्श का स्वरूप है।रुची सिंह यादव ने बताया कि देश देशांतर के कोने-कोने से आए हुए बलशाली राजाओं द्वारा धनुष को नहीं उठा पाने पर राजा जनक दुखी हो गए।

इसी बीच भगवान राम ने धनुष को तोड़कर जनक के दुख का निवारण किया। धनुष टूटते ही भगवान श्रीराम व जगत जननी जानकी का विवाह निश्चित हो गया था, क्योंकि विवाह की यही शर्त थी। वही राजा जनक ने विधि-विधान से लोक रीति, तथा वेद रीति को ध्यान में रखते हुए अपने एक प्रबुद्ध दूत को अयोध्या भेजकर महाराज दशरथ को आमंत्रण पत्र दिया। इस प्रसंग को सुनने के लिए सैकड़ो भक्तजनों की भीड़ उमड़ी रही।

यह भी पढ़ें:-मुरादाबाद : युवती की अश्लील फोटो किया वायरल

 

संबंधित समाचार