हल्द्वानी: कोरोना के दौरान मनरेगा बना रोजगार का साधन

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नरेन्द्र देव सिंह, अमृत विचार, हल्द्वानी। कोरोना की वजह से जहां राज्य में हजारों को लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा वहीं दूसरी ओर कोरोना के चलते आर्थिक गतिविधियां भी काफी प्रभावित हुईं। बार-बार लगे लॉकडाउन की वजह से कई लोग बेरोजगार हुए। ऐसे में मनरेगा की मदद से हजारों लोगों को रोजगार …

नरेन्द्र देव सिंह, अमृत विचार, हल्द्वानी। कोरोना की वजह से जहां राज्य में हजारों को लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा वहीं दूसरी ओर कोरोना के चलते आर्थिक गतिविधियां भी काफी प्रभावित हुईं। बार-बार लगे लॉकडाउन की वजह से कई लोग बेरोजगार हुए। ऐसे में मनरेगा की मदद से हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया गया। जिसमें ज्यादातर प्रवासी शामिल हैं। इसके चलते अन्य सालों की अपेक्षा कोरोना काल में मनरेगा से लाभांवित लोगों की संख्या में काफी उछाल आया है।

केंद्र सरकार की मनरेगा योजना में लोगों को गारंटी के साथ रोजगार दिया जाता है। इस योजना का मकसद श्रमिकों को बिना पलायन किए हुए रोजगार उपलब्ध कराना था। उत्तराखंड में कोरोना काल में जहां अन्य आर्थिक गतिविधियां काफी कम रहीं वहीं सरकार ने मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार दिया। यही नहीं कोरोना काल में अन्य सालों की अपेक्षा ज्यादा लोगों को रोजगार दिया गया है। राज्य सरकार के आंकड़े के अनुसार कोरोना काल में मनरेगा से जुड़ने वालों की संख्या अन्य सालों की अपेक्षा करीब 1.30 लाख ज्यादा रही। साथ ही मनरेगा के तहत कामों की संख्या भी अधिक रही।

मनरेगा के अंतर्गत सृजित मानव दिवस व लाभांवितों की संख्या

साल         लाभांवितों की संख्या        सृजित मानव दिवस
2017-18      662630                        22304235
2018-19      639054                        22182135
2019-20      661269                        20625216
2020-21      791092                        22067314

पूर्ण धनराशि खर्च की गई
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए राज्यांश के रूप में 46.55 करोड़ की राशि अवमुक्त की गई। यह पूरी धनराशि योजना के तहत खर्च कर दी गई। इस दौरान 17608 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया। राज्य में कुल 12.18 लाख परिवारों को जॉब कार्ड उपलब्ध कराए गए।

128216 पंजीकृत प्रवासियों को दिया गया रोजगार
कोरोना काल शुरू होते ही प्रवासियों को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना के तहत काम करना शुरू कर दिया गया। कुल 1.60 लाख नए श्रमिकों को पंजीकृत किया गया। इनमें 128216 पंजीकृत प्रवासी थे।

मनरेगा योजना के तहत लोगों को रोजगार दिए जाने का काम जारी है। प्रवासियों को बड़ी संख्या में मनरेगा योजना से जोड़ा गया है। जिससे श्रमिकों की आर्थिकी में काफी सुधार आया है।

– अरविंद पांडेय, पंचायती राज्य मंत्री, उत्तराखंड

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