बरेली: अक्षर विहार तालाब की मुक्त कराई फ्रीहोल्ड भूमि हाथ से फिसली
बरेली, अमृत विचार। 11 माह पूर्व अवैध कब्जा होने की बात कहते हुए प्रशासन द्वारा मुक्त कराई गई अक्षर विहार तालाब से लगी भूमि फिर हाथ से फिसल गई। जिम्मेदार अधिकारी पूर्णरूप से 2191 वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा लेने के लिए महीनों से बात ही करते रहे। इस बीच में मंडलायुक्त आर रमेश कुमार …
बरेली, अमृत विचार। 11 माह पूर्व अवैध कब्जा होने की बात कहते हुए प्रशासन द्वारा मुक्त कराई गई अक्षर विहार तालाब से लगी भूमि फिर हाथ से फिसल गई। जिम्मेदार अधिकारी पूर्णरूप से 2191 वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा लेने के लिए महीनों से बात ही करते रहे। इस बीच में मंडलायुक्त आर रमेश कुमार की चिट्टी भी कलेक्ट्रेट में घूमी कि मामले में दोबारा से जांच की जाए।
हालांकि, उनकी चिट्टी पर कोई जांच नहीं की गई। फिलहाल, जिन लोगों ने फ्री-होल्ड भूमि को खरीदा था, उन्हीं लोगों ने कोर्ट से निर्णय उनके पक्ष में आने की बात कहते हुए भूमि पर बाउंड्रीवाल बनवानी शुरू कर दी है। खरीदार कहते हैं कि प्रशासन ने जबरन उनकी भूमि पर कब्जा किया था। गुरुवार को निर्माण शुरू कराने के लिए ईंटें पहुंचीं। इसके साथ मजदूरों ने भी नींव की खोदाई का काम शुरू कर दिया है।
जनवरी में भूमि मुक्त कराई गई थी। उस दौरान हंगामा हुआ था। तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय के नेतृत्व में तत्कालीन एसडीएम सदर विशु राजा, तत्कालीन तहसीलदार सदर आशुतोष राणा ने अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह की मौजूदगी में भूमि खाली कराई थी। करीब 1.670 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले अक्षर विहार तालाब के अतिक्रमित क्षेत्रफल 2191 वर्ग मीटर से अतिक्रमण हटाया था। उस समय प्रशासन का कहना था कि फ्रीहोल्ड कराई गई भूमि से ज्यादा पर कब्जा किया गया था। जांच में इसकी पुष्टि के बाद भूमि मुक्त कराई गई थी।
मॉडल टाउन निवासी हरीश अनेजा के नाम 20 अक्टूबर, 2000 को अक्षर विहार तालाब के किनारे 6284 वर्ग मीटर का भूखंड फ्रीहोल्ड हुआ था। तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने नजूल संग तालाब की भूमि का कुछ हिस्सा भी फ्रीहोल्ड कर दिया था। यह बात वर्ष 2014-15 में हुई जांच में भी साफ हुई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। जनवरी, 2019 में हरीश अनेजा के बेटे परिणय अनेजा और उनके भाई व बहन ने फ्रीहोल्ड कराई भूमि 20 लोगों को संयुक्त रूप से बेच दी थी। 38000 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 6284 वर्ग मीटर भूमि खरीदी थी।
वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने वाली तालाब किनारे की भूमि लाभकौर तलवार ने 4298 वर्ग मीटर भूमि फ्री-होल्ड कराई थी। 17 नवंबर, 2012 को 2006.68 वर्ग मीटर भूमि गैन इन्फ्राकोन प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी थी। जनवरी में हुई प्रशासन की कार्रवाई के दौरान प्रिंस छाबड़ा के अधिवक्ता ने एसडीएम सदर को 2013 में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) शिशिर का पत्र भी दिखाया था। उस पत्र में साफ लिखा था कि यह भूमि न नजूल की है न तालाब की। सीलिंग में भी दर्ज नहीं थी।
हमारी भूमि कोर्ट ने हमें लौटा दी, अब बाउंड्रीवाल करा रहे
फ्रीहोल्ड भूमि खरीदने वाले संदीप झाबर ने बताया कि जनवरी में प्रशासन ने गलत तरीके से भूमि खाली कराई थी। कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दे दिया है। इसलिए भूमि पर बाउंड्रीवाल करा रहे हैं। ये भूमि प्रशासनिक अधिकारियों ने ही फ्रीहोल्ड की थी। इसके बाद जिन्हें फ्रीहोल्ड की गई थी, उनसे हमने खरीदी थी। ऐसे में कब्जा करने की बात गलत थी। प्रशासन ने हम लोगों के साथ अन्याय करते हुए भूमि पर जबरन कब्जा किया था। भूमि खरीदने के दौरान आवासीय में रजिस्ट्री कराई थी। सात लोगों ने मिलकर खरीदी थी।
मंडलायुक्त की चिट्ठी ने अफसरों पर खड़े किए थे सवाल
मंडलायुक्त के यहां भूमि खरीदने वालों ने दो बार शिकायती पत्र देते हुए दोबारा जांच की मांग उठाई, तब मंडलायुक्त ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को जांच कराने के लिए निर्देशित भी किया था। मंडलायुक्त के पत्र पर यह सवाल भी खड़ा हुआ था कि जनवरी माह में 20 साल पहले फ्री-होल्ड किए गए पट्टों के कागजातों की जांच और कई बार नापजोख के बाद यह कार्रवाई की गई थी। ऐसे मामले में दोबारा जांच के निर्देश देने की बात किसी के गले नहीं उतरी थी।
अक्षर विहार तालाब की भूमि से संबंधित नगर निगम के पास किसी तरह का कोर्ट से आदेश नहीं आया है। इसलिए इस बारे में मैं कोई जानकारी नहीं दे पाऊंगा। -अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
अक्षर विहार तालाब के पास जिस भूमि को पूर्व में खाली कराया था। उस भूमि पर नगर निगम का कब्जा है। तहसील स्तर से अब कोई जांच नहीं कराई जा रही है। कोर्ट से खरीदारों के पक्ष में आए निर्णय के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। -कुमार धर्मेंद्र, एसडीएम सदर
