हल्द्वानी: लापता होने से पहले ही कन्याल को चिकित्सकों ने मार डाला…?

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Edited By Amrit Vichar
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 सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। ट्रांसपोर्ट पवन कन्याल की मौत का रहस्य सुलझता नहीं दिख रहा। मौत हुई कैसे, अभी इस पर ही संशय है। इसकी वजह पवन के लापता होने और उसकी लाश बरामदगी की तारीख है। इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पवन की मौत की जो तारीख बताई, उसने पूरी की पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट …

 सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। ट्रांसपोर्ट पवन कन्याल की मौत का रहस्य सुलझता नहीं दिख रहा। मौत हुई कैसे, अभी इस पर ही संशय है। इसकी वजह पवन के लापता होने और उसकी लाश बरामदगी की तारीख है। इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पवन की मौत की जो तारीख बताई, उसने पूरी की पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट की मानें तो पवन की मौत उसके लापता होने के साथ ही हो गई थी, जबकि यह सच नहीं है।

आवास विकास सुभाषनगर निवासी ट्रांसपोर्टर पवन कन्याल 16 अगस्त को लापता हुआ और 17 सितंबर को उसकी लाश दो गांव के पास नैनीताल मुख्य सड़क से करीब आधा किमी नीचे जंगल से गुजरी एक गूल में मिली थी। पवन की पोस्टमार्टम हुआ और जब रिपोर्ट आई तो कई सवाल खड़े हो गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पवन के शरीर पर 25 जख्म मिले थे।

शरीर की कई हड्डियां टूटी थीं। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान कर चल रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के दबाव में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली। इधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सबसे बड़ा पेंच पवन की मौत के समय को लेकर फंसा। रिपोर्ट में कहा गया कि पवन की मौत लाश मिलने से तकरीबन एक माह पहले ही चुकी थी।

गौर करने वाली बात यह है कि 16 अगस्त को लापता हुए पवन की लाश 17 सितंबर यानी एक माह के भीतर मिली और रिपोर्ट मौत तकरीबन एक माह पहले बता रही है। ऐसे में क्या ये माना जाए कि लापता होते ही पवन की मौत हो गई थी। हालांकि गूल में पवन की लाश पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इस दावे का पूरी तरह खारिज कर रही थी।

न आत्महत्या के सुबूत मिले और न कत्ल के निशान
हल्द्वानी। पवन की लाश नैनीताल मुख्य सड़क से करीब पांच सौ मीटर नीचे जंगल में मिली थी और कार मुख्य मार्ग पर ही खड़ी थी। पुलिस इस मामले को आत्महत्या मान कर चल रही थी, लेकिन पुलिस इसे आत्महत्या साबित नहीं कर सकी और न ही कत्ल का रिपोर्ट दर्ज करने के बाद कत्ल साबित कर सकी। कुल मिलाकर इस घटना को साढ़े तीन माह गुजर जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। जबकि घटना स्थल का पुलिस कई बार निरीक्षण कर चुकी है और तमाम लोगों से पूछताछ भी।

किसी कीमत पर एक माह पुरानी नहीं थी लाश
हल्द्वानी। पवन की लाश गूल में मिली और देख कर ऐसा लग रहा था कि किसी ने पवन को उसमें फिट किया होगा। क्योंकि दोनों हाथ पवन की छाती पर थे और बांह पर रगड़ के निशान थे। लाश पूरी तरह सड़ी भी नहीं थी। इस हालत में थी कि आराम से पवन को पहचाना जा सकता था। जबकि एक माह पुरानी लाश को पहचानना मुश्किल होता है, अगर लाश के ऊपर उसके कपड़े या अन्य कोई साक्ष्य बरामद न हो तो। कई मामलों में एक माह पुरानी लाश की तो सिर्फ हड्डियां ही बरामद होती हैं।

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