बरेली: 1979 में नीलामी का 2015 में विक्रय पत्र जारी कर फंसे पूर्व डीएम गौरव दयाल
राकेश शर्मा, बरेली, अमृत विचार। 1979 में वाणिज्यकर विभाग द्वारा नीलाम की गई 3.757 हेक्टेयर भूमि का विक्रय पत्र 2015 में जारी करने के मामले में बरेली से लेकर लखनऊ तक के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। पहले तो भूमि की नीलामी अनियमित ढंग से कर दी। उसके बाद 2015 में सपा की सरकार …
राकेश शर्मा, बरेली, अमृत विचार। 1979 में वाणिज्यकर विभाग द्वारा नीलाम की गई 3.757 हेक्टेयर भूमि का विक्रय पत्र 2015 में जारी करने के मामले में बरेली से लेकर लखनऊ तक के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। पहले तो भूमि की नीलामी अनियमित ढंग से कर दी। उसके बाद 2015 में सपा की सरकार में तत्कालीन जिलाधिकारी गौरव दयाल ने विक्रय पत्र जारी कर दिया। विक्रय पत्र अवैध रूप से जारी करने के पुरजोर आरोप लग रहे हैं।
शासन व विधानसभा की याचिका समिति भी विक्रय पत्र अवैध रूप से जारी होना मान चुकी है। मामले में सीनियर आईएएस गौरव दयाल के साथ बहेड़ी तहसील के कई पूर्व अधिकारी की गर्दन भी फंस रही है। इस प्रकरण में कई स्तर की जांचें हो चुकी हैं। मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। एक मंत्री ने जब मामला शासन में उच्च स्तर पर रखते हुए अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की भूमि की नीलामी कराने के बाद अवैध रूप से विक्रय पत्र जारी होने का मामला रखा तब शासन ने जांच बैठाई। प्रकरण में दो बार याचिका समिति सुनवाई करते हुए बरेली से भेजी जाने वाली जांच आख्या को नकार चुकी है।
इस भूमि के 14 गाटा नंबर थे। करीब 12500 रुपये में 3.757 हेक्टेयर भूमि की नीलामी की गई। वर्तमान में इस भूमि की कीमत 1 अरब रुपये बताई जा रही है। फिलहाल, एसडीएम न्यायिक आशीष कुमार मामले की पड़ताल में लगे हैं। इसी सप्ताह विधानसभा की याचिका समिति में होने वाली सुनवाई में भी एसडीएम न्यायिक को भेजने की तैयारी है।
27 दिसंबर तक बिंदुवार आख्या शासन ने तलब की
विशेष सचिव राधेश्याम मिश्र की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा है कि चंद्र प्रकाश खंडूजा निवासी राजारानी, नियर बिड़ला स्कूल हल्द्वानी (जनपद नैनीताल) ने 1 दिसंबर को उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित पत्र भेजा। जिसमें प्रार्थी ने भूमि की नीलामी के संबंध में कई बिंदुओं पर न्यायहित में जांच कराने की अपेक्षा की।
इस संबंध में यह निर्देश हुए हैं कि खंडूजा के संदर्भित पत्र में उल्लिखित तथ्यों के संबंध में बिंदुवार आख्या शासन को 27 दिसंबर तक उपलब्ध करा दें। यह प्रकरण उत्तर प्रदेश विधानसभा की याचिका समिति की 29 अक्टूबर को हुई बैठक में प्रस्तुत की गई टिप्पणी पर आपत्ति के संबंध में है।
3.757 हेक्टेयर भूमि अनियमित ढंग से 42 साल पहले की गई थी नीलाम
उत्तर प्रदेश विधानसभा की याचिका समिति के दो बार सुनवाई करने के बाद समिति से जुड़े विधानसभा सदस्य शरद वीर सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को 16 दिसंबर को पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने कहा है कि बरेली की तहसील बहेड़ी के ग्राम सैदपुर बुजुर्ग की करीब 3.757 हेक्टेयर भूमि अनियमित ढंग से नीलाम की गई थी। इस नीलामी कार्रवाई में विक्रय पत्र 15 मई, 2015 को तत्कालीन जिलाधिकारी गौरव दयाल द्वारा अवैध रूप से जारी किया गया।
न्यायालय उप जिलाधिकारी बहेड़ी के आदेश 20 दिसंबर 2012 एवं 2014 एवं न्यायालय राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ से 31 अगस्त 2015 को स्थगन आदेश जारी हुआ। उस आदेश को खतौनी में दर्ज न कर भूमाफिया को अवैध बिक्री करने में तहसील द्वारा मदद की गई। इस संबंध में लोकहित में पांच बिंदुओं पर जांच कराई जानी अति आवश्यक है। पत्र में कहा गया है कि ज्वलंत विषय पर शासन से न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।
इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर न्यायिक जांच कराने की सिफारिश
- भूमि की नीलामी जमींदारी विनाश अधिनियम के तहत किस अधिकारी ने किस दिनांक को आदेश पारित किया।
- जिलाधिकारी बरेली द्वारा नीलामी का अनुमोदन किस दिनांक को किस व्यक्ति के पक्ष में किया गया।
- न्यायालय उप जिलाधिकारी बहेड़ी के आदेश 29 दिसंबर 2014 का खतौनी में दर्ज न करना।
- न्यायालय राजस्व परिषद लखनऊ का आदेश 31 अगस्त 2015 का खतौनी में दर्ज न करना।
- तहसीलदार बहेड़ी ने 3 जुलाई 2015 को उक्त नंबरों से चंद्र प्रकाश का नाम निरस्त करने के आदेश किए, जबकि 3 जुलाई 2015 को उक्त नंबरों में चंद्र प्रकाश का नाम दर्ज ही नहीं था।
