अमेठी: कोयले की भट्ठियां आबोहवा में घुल रहा जहर

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अमेठी। जिले में भारी संख्या मे संचालित कोयले की भट्ठियां आबोहवा को प्रदूषित कर रही हैं। इससे पेड़ पौधों को भी खतरा है। कोयला भट्टियों के संचालक ने पर्यावरण विभाग से मंजूरी ली है लेकिन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इन भट्टियों से काला धुआं निकलता है। कोयले की भट्ठियां का असर …

अमेठी। जिले में भारी संख्या मे संचालित कोयले की भट्ठियां आबोहवा को प्रदूषित कर रही हैं। इससे पेड़ पौधों को भी खतरा है। कोयला भट्टियों के संचालक ने पर्यावरण विभाग से मंजूरी ली है लेकिन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इन भट्टियों से काला धुआं निकलता है। कोयले की भट्ठियां का असर लोगों की किडनी, दिमाग और नाड़ी तंत्र को प्रभावित कर सकता है। लकड़ी से कोयला बनाने का यह धंधा क्षेत्र में खूब चल रहा है। जंगल की लकड़ी कटवाकर भट्टियों में कोयला तैयार किया जाता है।

कोयले की सप्लाई कानपुरऔर लखनऊ, गाजियाबाद, में की जाती है। यहां पर एक भट्टी की पर्यावरण विभाग से अनुमति लेकर दो-दो भट्टियां चलाई जा रही हैं। वन विभाग के क्षेत्रीय वन रेंज अधिकारी ने बताया कि भट्टियां पर्यावरण विभाग की मंजूरी से चल रही हैं। नियमानुसार गांव से एक किलोमीटर और वन विभाग से छह किलोमीटर की दूरी पर भट्टियां संचालित हो सकती हैं। यदि कहीं नियमों के उल्लंघन की बात सामने आएगी तो कार्रवाई की जाएगी।

एक भट्टी संचालक का कहना है कि लकड़ी की कमी से रेट बढ़ गए हैं। इससे नुकसान हो रहा है। दो भट्टियों के लिए 50 हजार रुपए वानिकी विभाग में जमा कर लाइसेंस लिया था। वन कर्मी भी हर महीने वसूली करते हैं। पिछले वर्ष लकड़ी 200 रुपए कुंतल थी जबकि इस वर्ष 400 रुपए कुंतल है। एक भट्टी में 25-30 कुंतल के बीच कोयला निकलता है।

पर्यावरण संरक्षण के अधिकारीगण बताते हैं कि भट्टियों से निकलने वाले धुएं से कार्बन डाई आक्साइड, अमोनिया, हाइड्रोकार्बन गैस निकलती है। गैस मानव शरीर, दिमाग, किडनी और नाड़ी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उधर, कृषि विभाग के रीडर तथा वैज्ञानिको का कहना है कि भट्टियों के धुएं का प्रभाव पौधों पर भी पड़ता है। फसलों का उत्पादन कम हो जाता है। पेड़ पौधों की हरी पत्तियां गिर जाती है और पौधो का विकास नही हो पाता।

बोले चिकित्सक

चिकित्सक डॉ . सत्य देव प्रजापति बताते हैं कि धुएं का असर फेफड़ों पर पड़ता है। इससे अस्थमा, हार्टअटैक, छाती दर्द, टीबी आदि हो सकती है। जैसी कई जान लेवा बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है।

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