मुरादाबाद : खेलने की उम्र में बाबुल के आंगन से विदा हो रहीं बेटियां

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

जूही/अमृत विचार। केंद्र सरकार लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने जा रही है। सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि 18 वर्ष की आयु तक लड़कियां मानसिक रूप से परिपक्व नहीं हो पातीं। ऐसे में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार …

जूही/अमृत विचार। केंद्र सरकार लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने जा रही है। सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि 18 वर्ष की आयु तक लड़कियां मानसिक रूप से परिपक्व नहीं हो पातीं। ऐसे में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में ही 10 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जिनकी कम उम्र में शादी हो गई और दो फीसदी नाबालिग रहते हुए मां भी बन गई।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में पांच सालों में जिले के 953 परिवारों, 1264 महिलाओं और 160 पुरुषों पर जो जानकारी जुटाई गई है वह बेहद चिंताजनक है। सर्वे में महिलाओं की स्थिति खराब नजर आई है। 20 से 24 वर्ष की शादीशुदा महिलाओं से उनकी जानकारी ली गई तो पता चला कि 15 से 17 के बीच शादी होने वाली महिलाओं की संख्या 10.1 फीसदी है। वहीं 15 से 19 वर्ष के बीच दो फीसदी महिलाएं मां बन गई थी।

44.9 फीसदी एनीमिया की शिकार
सर्वे में 15 से 19 साल की 45.7 फीसदी बेटियां एनीमिया की शिकार मिलीं। 15 से 49 साल की 44.9 फीसदी बेटियां और महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई गईं। वहीं 15 से 49 साल की बेटियां और गर्भवती 45.5 फीसदी एनीमिक मिली हैं।

3.6 फीसदी कर रहीं तंबाकू का सेवन
-जिले की 3.6 प्रतिशत बेटियां ऐसी हैं, जिन्होंने 15 वर्ष की उम्र के बाद तंबाकू खाना शुरू कर दिया हैं। जबकि 15 वर्ष की 0.3 फीसदी बेटियां ऐसी हैं, जो शराब का सेवन कर रही हैं।

6.2 फीसदी किशोरियों व महिलाओं का ब्लड शुगर बढ़ा
– सर्वे में 15 से 49 साल की बेटियों और महिलाओं की ब्लड शुगर की जांच की गई है। इसमें 6.2 फीसदी का ब्लड शुगर बढ़ा मिला है। इनका ब्लड शुगर 160 से अधिक रहा है।

21.3 फीसदी महिलाएं हाइपरटेंशन का शिकार
जिले में 21.3 फीसदी महिलाएं हाइपरटेंशन की शिकार पाई गई हैं। इनका ब्लड प्रेशर 140-159 के बीच पाया गया। इसमें 6.4 फीसदी महिलाएं ऐसी मिलीं, जोकि अधिक हाइपरटेंशन की शिकार हैं।

78.5 फीसदी महिलाएं अपना रहीं मासिक धर्म सुरक्षा
सर्वे में जिले में 15 से 24 वर्ष की आयु की 78.5 फीसदी महिलाएं एवं बेटियां पाई गई जोकि मासिक धर्म के दौरान सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों का उपयोग कर रही है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कम उम्र में बेटियों की शादी करना गलत है। छोटी उम्र में बेटियां शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाती है। ऐसे में बेटी एनीमिक होगी तो आगे चलकर कई परेशानियां बन सकती हैं। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है। पहले से सुधार हुआ है लेकिन, बाल विवाह अभी भी जारी है। इन पर ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है। – डा. वीमिता अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ

लड़कियों की छोटी उम्र में शादी के लिए परिवार ही पूरे तरीके से दोषी है। ऐसे में सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसका जरूरतमंद लाभ ले सकते हैं। छोटी उम्र में शादी होने से बेटियां कम उम्र में मां बन जाती है। इसके लिए वह पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो पाती। इससे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचने के आसार रहते हैं। डा. सुनीता पांडेय, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल

 

संबंधित समाचार