लखनऊ: शक्तिवर्धक दवाओं के लिए प्रदेश में जमकर हो रही कछुओं की तस्करी

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लखनऊ। पुरुषों की शक्ति बढ़ाने की चाहत बेजुबान कछुओं के लिए काल बनती जा रही है। दरअसल कामोत्तेजना बढ़ाने वाली शक्तिवर्धक दवाओं के निर्माण, कंघे, बटन, कफलिंग्स आदि बनाने के लिए प्रदेश में कछुओं की बड़े पैमाने पर शिकार व तस्करी की जा रही है। जानकर हैरानी होगी कि देश में कछुओं की तस्करी के …

लखनऊ। पुरुषों की शक्ति बढ़ाने की चाहत बेजुबान कछुओं के लिए काल बनती जा रही है। दरअसल कामोत्तेजना बढ़ाने वाली शक्तिवर्धक दवाओं के निर्माण, कंघे, बटन, कफलिंग्स आदि बनाने के लिए प्रदेश में कछुओं की बड़े पैमाने पर शिकार व तस्करी की जा रही है। जानकर हैरानी होगी कि देश में कछुओं की तस्करी के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। वहीं इस तस्करी के तार उत्तर प्रदेश से लेकर विदेशों तक जुड़े हैं।

24 में से 11 प्रजातियां उत्तर प्रदेश में

वन विभाग के मुताबिक देश में पाई जाने वाली कछुओं की 24 विभिन्न प्रजातियों में से 11 प्रमुख प्रजातियां उत्तर प्रदेश में ही बहुतायत में पाई जाती हैं। इन सभी 11 प्रजातियों की जमकर तस्करी की जाती है। उत्तर प्रदेश की गंगा, यमुना, चंबल, गोमती, घाघरा, गंडक जैसी नदियों, सहायक नदियों व बड़े तालाबों में बहुतायत में पाया जाता है। लखनऊ, सीतापुर, सुल्तानपुर, इटावा, एटा, मैनुपुरी, गाजियाबाद, फर्रूखाबाद, कानपुर देहात आदि शहरों में इनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता है।

इनमें से ‘’फ्लैपशेल टर्टल’’ व “स्मॉल सॉफ्टशेल टर्टल’’ का शक्तिवर्धक दवाओं का निर्माण के लिए जमकर शिकार होता है। दरअसल इनमें सॉफ्ट सेल को कामोत्तेजना बढ़ाने वाली शक्तिवर्धक दवाएं बनाने में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा मवेशियों के चारे, मछलियों का दाना के रूप में इनके मांस का इस्तेमाल होता है। वहीं अन्य प्रजाति के कछुओं को मारकर इनके हार्ड सेल से कंघे, बटन, कफलिंग्स, हेयर क्लचर आदि बनाये जाते हैं।

पश्चिम बंगाल के माध्यम से विदेश भेजे जाते टर्टल सेल (कछुओं की खोल)

वन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से बड़े पैमाने पर पकड़े जाने वाले कछुओं को मारकर उनकी खोल व मांस अलग कर लिये जाते हैं। हाल ही में यूपी एसटीएफ ने कछुओं के दो बड़े तस्करों को सुल्तानपुर से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के अनुसार कछुओं के मांस को स्थानीय स्तर पर विभिन्न कामों के लिए उपयोग किया जाता है। जबकि कछुए के खोल को पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र के बड़े स्मगलर्स के माध्यम से बांग्लादेश व म्यांमार के समुद्री रास्ते चीन, हांगकांग, मलेशिया, अरब जैसे देशों को बेचा जाता है।

सुल्तानपुर में पकड़े गये कछुओं के तस्करों से कई सुराग मिले हैं। वे पश्चिम बंगाल के बड़े तस्करों को कछुओं के सेल्स बचते थे। जिन्हें विदेशों को अवैध रूप से बेचा जाता था। फिलहाल उनसे और पूछताछ चल रही है। एसटीएफ इस रैकेट के पर्दाफाश में लगी हुई है…विशाल विक्रम सिंह, एएसपी, एसटीएफ।

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