पार्टियों को बंद करना चाहिए जातिगत सम्मेलन: प्रदेश अध्यक्ष

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Edited By Amrit Vichar
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बहराइच। जिले में प्रतिभा संरक्षण सेवा न्यास बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव को देखते हुए अपना सुझाव जारी किया है। उनका कहना है कि कोई भी पार्टी जातिगत सम्मेलन के बजाए प्रतिभा पर ध्यान दें। इससे हर समाज के लोगों को इसका लाभ मिले। उन्होंने जातिगत सम्मेलन को बंद कराने के लिए चुनाव आयोग …

बहराइच। जिले में प्रतिभा संरक्षण सेवा न्यास बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव को देखते हुए अपना सुझाव जारी किया है। उनका कहना है कि कोई भी पार्टी जातिगत सम्मेलन के बजाए प्रतिभा पर ध्यान दें। इससे हर समाज के लोगों को इसका लाभ मिले। उन्होंने जातिगत सम्मेलन को बंद कराने के लिए चुनाव आयोग से भी मांग की है। विधानसभा चुनाव के लिए पार्टियों की ओर से तैयारी की जा रही है। साथ ही विभिन्न पार्टियों की ओर से जातिगत सम्मेलन भी आयोजित किए जा रहे हैं।

इससे हर जाति के आपस में बांट रहे हैं। इससे हमारे समाज को नुकसान होगा। यह बातें प्रतिभा संरक्षण इकाई के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर देवेंद्र मोहन उपाध्याय ने कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीति जिस तरह जातिवाद के भंवरजाल में फंसे चुकी है, उससे उबारना अब बहुत मुश्किल है। राजनैतिक पार्टियां अपना समीकरण साधने के लिए जिस प्रकार जातिगत सम्मेलन करा कर सत्ता में आना चाह रही है वह किसी भी मायने में एक स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। ऐसे सम्मेलन केवल एक ही राजनैतिक दल नहीं अपितु सभी राजनैतिक दलों द्वारा कराये जा रहे है।

जहां एक तरफ हम समरसता की बात करते हुए सभी को एक जुट करने के नारे लगाते हैं। किसी के ऊपर जातिगत टिप्पणी करने पर उस पर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमें दर्ज कराते हैं। लेकिन जब हमें वोट की राजनीति करनी होती है, तब बड़े-बड़े मंच बनाकर सैकड़ों ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से उस जाति का नाम लेकर चिल्लाते रहते हैं ऐसे में सामाजिक समरसता को हम कैसे कायम कर सकते हैं। यह एक यक्ष प्रश्न है।

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इन जातिगत सम्मेलनों की शुरूआत सबसे पहले कुछ राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पार्टियों ने शुरू किया। जिसका परिणाम यह रहा है कि हर जातियों के अलग-अलग आकाओं का जन्म होने लगा ऐसे नेताओं की ओर से जातियता का बिगुल तब बजाया जाता है। जब किसी भी प्रदेश में चुनाव नजदीक आ जाता है, उस दौरान वे इतना सम्मेलन करा डालते हैं कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां उन्हें रिझाने के लिए अपने पिटारे खोल देती है। लेकिन यह पिटारा उन जातियों के सभी लोगों के लिए नहीं अपितु उस के इकलौते नेता के लिए खोलती है जो समर्थन करने के लिए पार्टी से कहता है कि हमारी जाति के लोग चुनाव में आपका साथ देंगे, चुनाव सम्पन्न होने के बाद उस जाति के अगुआ नेता को पार्टी में कैबिनेट मंत्री का ओहदा दे दिया जाता है और जातियां फिर हांसिए पर आ जाती है। इस जगह पर ये कहावत बहुत फिट बैठती है। साथ ही कहा कि मित्रों आप वस्तु नहीं अपितु इस देश की वह प्रतिभा है। जिसके एक वोट से सरकारें बनती और बिगड़ती है। ऐसे में चुनाव आयोग को भी इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

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