बरेली: जिले में घटा पर मंडल में बढ़ा राजकीय पक्षी सारस का कुनबा
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश सरकार ने राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण के निर्देश वन विभाग को दिए थे। लिहाजा विभाग सारस की निगरानी के साथ साल में दो बार गणना कराता है। जिले में जहां ग्रीष्मकालीन गणना के दौरान सारसों की संख्या बढ़ी थी तो दूसरी तरफ इस बार हुई शीतकालीन गणना में सारसों का …
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश सरकार ने राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण के निर्देश वन विभाग को दिए थे। लिहाजा विभाग सारस की निगरानी के साथ साल में दो बार गणना कराता है। जिले में जहां ग्रीष्मकालीन गणना के दौरान सारसों की संख्या बढ़ी थी तो दूसरी तरफ इस बार हुई शीतकालीन गणना में सारसों का कुनबा जिले में कम हो गया। हालांकि, मंडल की अगर बात करें तो ग्रीष्मकालीन गणना के मुकाबले शीतकालीन गणना में सारसों की संख्या में मामूली इजाफा हुआ है।
इस साल ग्रीष्मकालीन गणना में जहां कुल 326 सारस मिले थे तो वहीं इस बार शीतकालीन गणना में यह आंकड़ा घटकर 277 रह गया है। यानी कुल 49 सारस इस बार कम मिले हैं। जिले में सारसों की संख्या कम होने पर वन विभाग के अधिकारी कोई ठोस वजह तो नहीं बता पा रहे लेकिन मौसम के मुताबिक आसपास के वेटलैंड में पलायन करने की बात जरूर सामने आई है। हालांकि, बरेली मंडल में ग्रीष्मकालीन गणना के मुकाबले इस बार सारसों की संख्या जरूर बढ़ी है।
अधिकारियों की माने तो इस बार कुल 2004 सारस पूरे मंडल में चिन्हित किए गए हैं। जबकि ग्रीष्मकालीन गणना के दौरान यह आंकड़ा 1961 था। बदायूं में 57 से बढ़कर 121 सारस चिन्हित किए गए तो शाहजहांपुर में 1578 से बढ़कर इस बार यह संख्या 1606 हुई है। हालांकि बीते सालों के मुकाबले सारस का कुनबा बरेली के तराई इलाकों में बढ़ा है।
बता दें कि साल में दो बार इनके संरक्षण के लिए गणना होती है। प्रदेश में सारस संरक्षण समिति का भी गठन किया गया है। यह समिति पानी से तर रहने वाले स्थलों के विकास और संरक्षण के साथ सारस संख्या में वृद्धि के सभी कारकों में मदद करती है।
वातावरण को सुरक्षित रखता है राजकीय पक्षी
सारस अधिकतर नम इलाकों और खेतों में रहते हैं। पानी में पैदा होने वाली वनस्पति की जड़ खाते हैं। मेढ़क, मछली, छिपकली, सांप, घोंघा और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े-मकौड़े भी इनका भोजन हैं। फसलों के दानों को भी यह चुगते हैं। सारस की उपस्थिति से फसल कीटों से सुरक्षित रहती है। इससे वातावरण भी सुरक्षित और संरक्षित रहता है।
विभाग द्वारा सारस के संरक्षण के लिए साल में दो बार गणना कराई जाती है। हमारी टीमें इनकी निगरानी भी कर रही हैं। इस बार पूरे बरेली मंडल में कुल 2004 सारस मिले हैं। अकेले बरेली जिले में 277 राजकीय पक्षी चिन्हित किए गए हैं। -ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक
