बरेली: गिरीग्राम तकनीकी पार्क का किया जा रहा विस्तार
बरेली, अमृत विचार। बीते वर्ष 2020 में किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान और भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कुक्कुट पालन के लिए गिरीग्राम तकनीकी पार्क तैयार किया गया था, उसका अब सीएआरआई विस्तार कर रहा है। इससे मुर्गी पालन के अलावा बटेर, कोयल को भी मॉडल …
बरेली, अमृत विचार। बीते वर्ष 2020 में किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान और भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कुक्कुट पालन के लिए गिरीग्राम तकनीकी पार्क तैयार किया गया था, उसका अब सीएआरआई विस्तार कर रहा है। इससे मुर्गी पालन के अलावा बटेर, कोयल को भी मॉडल के तहत निगरानी में रखा जा सकता है।
मॉडल के तहत मुर्गियों को खाने में बरसीम, केंचुआ और मोरिंगा दिया जाता है।
केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. एके तिवारी ने बताया कि मुर्गी पालन देश में दो तरीके से हो रहा है। एक तो बैकायार्ड में और दूसरा व्यावसायिक तरीके से। गिरीग्राम मॉडल के तहत एक बार फिर से बैकायार्ड पोल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा मिल रहा है। इस समय देश में 30 प्रतिशत बैकायार्ड मुर्गी पालन हो रहा है।
इसमें कई तरीके के मॉडल बनाने की कोशिश की गई। बैकायार्ड मुर्गी पालन करने वाले मॉडल के तहत कम से कम लागत में पोल्ट्री के लिए घर तैयार कर सकते हैं। आसानी से मिलने वाले सामान जैसे बांस और पराली से घर बनाए जा सकते हैं।
सीमित जगह में किया जा रहा विस्तार
गिरीग्राम मॉडल शुरुआत में एक एकड़ में तैयार किया गया था। गिरीग्राम मॉडल के लिए सरकार की ओर से 6.86 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था। मॉडल के विस्तार के लिए वर्तमान में बने गिरीग्राम मॉडल के सामने की जगह को तैयार किया जा रहा है। विस्तार किए गए पार्क के लिए सीमित जगह होने के चलते इसे 1400 वर्गफुट में बनाया जा रहा है। इसमें निर्माण के समय केंचुए उत्पादन के गड्ढे, बागबानी, कार्यालय, प्रवेश द्वार, पुष्प उत्पादन प्रक्षेत्र, मुर्गियों के रहने के लिए झोपड़ी समेत अन्य आवश्यक लेआउट का निर्माण किया जाएगा।
शुरुआत में मुर्गियों की चार प्रजातियों पर रखी गई नजर
प्रधान वैज्ञानिक डा. चंद्रहास ने बताया कि सितंबर 2020 में गिरीग्रॉम मॉडल की शुरुआत की गई थी जिसमें सबसे पहले सीएआरआई में निर्मित प्रजातियों को रखा गया था। जिसका समय-समय पर वैज्ञानिकों की ओर से निरीक्षण किया जाता रहा। इस दौरान कैरी श्यामा, कैरी निर्भीक, कड़कनाथ, आशील पीला जैसी प्रजातियों को रखा गया, जिसके सकारात्मक परिणामों के बाद ही पार्क के विस्तार किया जा रहा है।
छह अन्य केंद्रों पर भी चल रहा शोध
केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. राज नारायण ने बताया कि सीएआरआई बरेली में कुक्कुट पालन के लिए गिरीग्राम मॉडल को विकसित किया गया था। वहीं, बेगूसराय स्थित अनुसंधान केंद्र में गाय, पटना स्थित अनुसंधान केंद्र में भैंस, हैदराबाद स्थित अनुसंधान केंद्र में पोल्ट्री वर्ड, चंडीगढ़ स्थित अनुसंधान केंद्र में कोयल, बटेर, मुरैना, भिंड स्थित अनुसंधान केंद्र में बकरी, जैसलमैर स्थित अनुसंधान केद्र में बकरी के परिपेक्ष्य में मॉडल को विकसित कर शोध किया जा रहा है जिसकी संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार कर भारत सरकार को सौंपी जाएगी।
