झांसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने पर उठने लगी विरोध की आवाज
झांसी। उत्तर प्रदेश की वीरांगना नगरी झांसी के रेलवे स्टेशन का नाम बदले जाने को लेकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कई प्रबुद्ध लोग और संगठन रेलवे स्टेशन के नाम से झांसी हटाये जाने को लेकर खुलकर नाराजगी का जाहिर कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और …
झांसी। उत्तर प्रदेश की वीरांगना नगरी झांसी के रेलवे स्टेशन का नाम बदले जाने को लेकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कई प्रबुद्ध लोग और संगठन रेलवे स्टेशन के नाम से झांसी हटाये जाने को लेकर खुलकर नाराजगी का जाहिर कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने आज इस मामले पर यहां झांसी-ललितपुर सांसद अनुराग शर्मा से मुलाकात कर अपना विरोध व्यक्त किया और वीरांगना लक्ष्मीबाई के नाम के साथ ही रेलवे स्टेशन के नाम में झांसी भी जोड़े जाने को लेकर उनके माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गयी कि झांसी के सम्मान में रेलवे स्टेशन के नाम में वीरांगना लक्ष्मीबाई के नाम के साथ-साथ झांसी भी जोड़ा जाए तभी झांसी वाले खुद को सम्मानित एवं गौरवान्वित महसूस करेंगे।
व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय पटवारी एवं वरिष्ठ व्यापारी नेता राजीव राय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा गया,“ मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी” झांसी रानी के यह शब्द आज भी संपूर्ण विश्व में गुंजायमान है, इसी परिपेक्ष में सरकार द्वारा झांसी स्टेशन का नाम वीरांगना लक्ष्मीबाई कर दिया गया है पर झांसी वालों का यह मानना है कि इस नाम के आगे झांसी भी अवश्य जोड़ा जाना चाहिए।”
इस संबंध में सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि निश्चित ही झांसी के सम्मान में झांसी का नाम भी अवश्य जुड़ना चाहिए और आश्वासन दिया कि वह रेल मंत्री से बात कर झांसी नाम जुड़वाने का पूरा प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि झांसी और बुंदेलखंड के विकास के लिए अनवरत रूप से कार्य कर रहे हैं। नाम परिवर्तन को लेकर पुरातत्वविद् और महारानी के अंगरक्षक गुल मोहम्मद के पड़पौत्र वसीम खां ने बड़ी नाराजगी जतायी।
उन्होंने कहा कि झांसी के नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है। झांसी की रानी महारानी लक्ष्मीबाई से जुड़ा इतना इतिहास देशी और विदेशी इतिहासकारों ने लिखा है लेकिन स्टेशन का नाम बदलकर उस पूरे इतिहास को एक झटके में शून्य कर दिया गया।
पढ़ें- बहराइच: मानदेय बढ़ोत्तरी को अनुदेशकों ने बताया छलावा, मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
