चुनावी मुद्दा : दर्द का आइना…लाखों हुनरमंदों की आवाज की सुनवाई बेअसर

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आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। वो मुतमईन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता, हम बेकरार हैं आवाज में असर के लिए… जन कवि दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां मुरादाबादी दस्तकारों के दर्द का आइना हैं। जिनके हुनर से दुनिया भर में यहां के धातु उत्पादों का डंका है। मगर ऐसे हाथों की तरक्की और सामाजिक सुरक्षा के …

आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। वो मुतमईन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता, हम बेकरार हैं आवाज में असर के लिए… जन कवि दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां मुरादाबादी दस्तकारों के दर्द का आइना हैं। जिनके हुनर से दुनिया भर में यहां के धातु उत्पादों का डंका है। मगर ऐसे हाथों की तरक्की और सामाजिक सुरक्षा के सरकारी प्रयास झुनझुना से अधिक कुछ भी नहीं हैं।

संसदीय इतिहास की चर्चा करें तो यहां के लाखों दस्तकारों की पीड़ा की हर दौर में अनदेखी हुई। जिन हाथों से पीतल की चमक बढ़ती है, उनका गुजर- बसर बहुत नाजुक दौर में है। इस वजह से ऐसे हुनरमंद पलायन को मजबूर हैं। करीब एक लाख दस्तकार देश से बाहर काम कर रहे हैं। वर्ष 2011-12 के कारोबारी सर्वे बताते हैं कि मुरादाबाद में 3.60 लाख कामगार धातु निर्मित उत्पादों की छिलाई, ढलाई, ग्लाइडरिंग, वेल्डिंग इंग्रेविंग का कार्य करते हैं।

पैकेजिंग और प्लेटिंग इनके हुनर का ही पैमाना है। यानी एक उत्पाद 26 हाथों से गुजर कर बाजार के लिए तैयार होता है। दस्तकारों की डायरी बताती है कि वर्ष 2010-11 और 2012-13 में यहां का निर्यात बढ़ा था। उस दौर में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारोबार 20,000 करोड़ रुपये था। जो इन दिनों 8000 से 9000 करोड़ में सिमट गया है। जानकार इसके पीछे महंगाई को कारण मानते हैं। दस्तकार और कारखानेदारों के प्रशिक्षण के प्रबंध पर सवाल उठाते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि पीतल नगरी में निर्यातक, निर्माता और दस्तकार प्रमुख कड़ी हैं। परंपरागत कार्य को बचाए रखने के लिए नेशनल टेक्निकल इंस्टिट्यूट की मांग लंबे समय से की जा रही है। वैसे राज्य और केंद्र सरकार की ओर से दस्तकारों के प्रशिक्षण के कार्य जारी है। जानकार कहते हैं कि मुरादाबाद अब तक औद्योगिक क्षेत्र नहीं बन गया है। यहां इंडस्ट्रियल पार्क का निर्माण कागजों में है। पूरा कारोबार कुटीर है।

मुख्यालय के अलावा अगवानपुर, ठाकुरद्वारा, कुंदरकी, बिलारी, ताहरपुर, भोजपुर, धर्मपुर और काशीपुर रोड के गांव इसके बड़े केंद्र हैं। शहर के करूला, जाहिद नगर, रहमत नगर, जयंतीपुर, आजाद नगर और पंडित नगला क्षेत्र में गैस पाइप लाइन का विस्तार हो गया है। जिससे 1.25 लाख दस्तकार गैस की भट्ठी पर अपने माल तैयार कर रहे हैं। लेकिन, शहर के पुराने और प्रसिद्ध इलाकों में अभी भी कोयले की भट्ठियों पर उत्पाद बनाए जा रहे हैं। जिसको लेकर कभी पुलिस, कभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कभी प्रशासन के छापे पड़ते रहते हैं। मुरादाबाद की दस्तकारी पर शोध करने वाले डा.एमडी तिवारी कहते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में यहां पलायन बढ़ा है। मुरादाबाद के शिल्पकार नेपाल, बांग्लादेश, सऊदी अरब में पहुंच गए हैं। उन्हें यहां जरूरी सुविधा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। इनके जीवन स्तर में सुधार और आमदनी पर स्पष्ट नियमावली होनी चाहिए।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी (मुरादाबाद) सुरेंद्र सिंह ने बताया कि 80 वर्ष से अधिक उम्र व दिव्यांग मतदाताओं को इस बार वोट डालने के लिये मतदेय स्थल जाने की मजबूरी नहीं होगी। चुनाव आयोग ने ऐसे लोगों के लिये घर पर ही मतदान करने की विशेष सहूलियत दी है। इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग ने विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी कर दिये हैं।

न जरूरी सुविधाएं हैं और न ही सामाजिक सुरक्षा
ऑल इंडिया हैंडीक्राफ्ट बोर्ड के पूर्व सदस्य आजम अंसारी कहते हैं कि यहां कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है। अनुदान की मांग को वर्षों से अनसुना किया जा रहा है। 2010 में इस कारोबार को पटरी पर लाने का प्रयास तत्कालीन सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन ने किया था। गेल इंडिया से परियोजनाएं स्वीकृत कराईं थीं। अब वह काम टोरेंट कंपनी को मिल गया है। तब दस्तकारों के लिए पांच एंबुलेंस, 500 लाइटें मिली थीं। गैस पाइप लाइन की मांग तभी से की जा रही है।

दो सीटों पर उतारेंगे महिला उम्मीदवार
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में सत्ता का संग्राम छिड़ने के बाद कांग्रेस जिले सहित पूरे प्रदेश में अपने बूते सरकार बनाने के लिए जनता से समर्थन मांग रही है। कांग्रेस ने यूपी के चुनावी रण में राष्ट्रीय महासचिव और मुरादाबाद की बहू प्रियंका गांधी को आगे किया है। प्रियंका की प्रतिज्ञाओं से उनके ससुराल की जनता कितना प्रभावित है। छह सीटों पर जीत के लिए कांग्रेस किस गणित को फिट मानती है। जिलाध्यक्ष असलम खुर्शीद से अमृत विचार संवाददाता विनोद श्रीवास्तव की खास बातचीत..

सवाल-जिले में कांग्रेस चार दशक से विधानसभा चुनाव में जीत के लिए तरस रही है, इस बार किस बूते पार्टी खुद को विरोधियों के मुकाबले खड़ा पाती है।
जवाब-देखिए यह सही है कि 1984 के चुनाव में शहर विधानसभा में जीत के बाद पार्टी के लिए आगामी चुनावों में निराशा मिली। मगर इस बार समीकरण बदलें हैं, सपा, बसपा के कार्यकाल में जनता ने अपराधीकरण और भ्रष्टाचार देखा और अब पांच साल में भाजपा का कुशासन। जनता की उम्मीद अब कांग्रेस है।

सवाल-मुरादाबाद जिले में वह कौन से प्रमुख मुद्दे हैं जो जनता को प्रभावित कर रहे हैं, जिस पर कांग्रेस कुछ अलग कर दिखाएगी।
जवाब-महंगाई देश की जनता की कमर तोड़ चुकी है। जनता का पेट जुमलों से नहीं भरता, कांग्रेस की सरकार बनी तो महंगाई पर लगाम लगाकर मुरादाबाद में पीतल कारोबार को समृद्ध कर फिर से नया आयाम दिया जाएगा। क्योंकि पीतलनगरी को विरोधी दलों की सरकारों ने बर्बाद कर दिया। इस कारोबार में लगे नौजवान आज ई-रिक्शा, आटो रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पाल रहे हैं। पार्टी रोजगार सृजन करेगी।

सवाल-धर्म, जाति का मुद्दा मुरादाबाद में कितना असरकारी और वोटों के ध्रुवीकरण में अहम रहेगा।
जवाब-जाति-धर्म की राजनीति कांग्रेस का विषय नहीं, इसके ठेकेदार भाजपा-सपा और बसपा हैं। जनहित और लोकहित कांग्रेस के विषय हैं। धर्म और जाति के नाम पर नफरत फैलाने का काम दूसरे दलों को करने दीजिए। हम इंसानियत और मोहब्बत का पैगाम लेकर चलते हैं।

सवाल- प्रियंका गांधी ने अपनी प्रतिज्ञाओं में महिलाओं को चालीस फीसदी टिकट देने और लड़की हूं लड़ सकतीं हूं आदि नारों से लुभा रहीं हैं। यह मुरादाबाद में कितना सार्थक होगा।
जवाब- मुरादाबाद की बहू प्रियंका गांधी से आधी आबादी ही नहीं पूरा देश प्रभावित है। उनकी प्रतिज्ञा साकार होगी। जिले में चालीस फीसदी के आंकड़े के अनुसार पार्टी छह में से दो सीट पर महिला उम्मीदवार उतारेगी और जिताएगी भी। लड़कियों के उच्च शिक्षा के लिए स्मार्ट फोन, स्कूटी हम सरकार में आने पर देंगे।

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