खटीमा मेरी कर्मभूमि, यहां की जनता का मुझ पर ऋण- धामी
हल्द्वानी, अमृत विचार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं के चुनाव लड़ने पर स्थिति साफ कर दी है। अपनी सरकार के छह महीने पूरे होने के मौके पर खटीमा में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं के चुनाव लड़ने पर जनता से ही हाथ उठवाकर समर्थन मांगकर जबाव मांग लिया। धामी ने कहा, …
हल्द्वानी, अमृत विचार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं के चुनाव लड़ने पर स्थिति साफ कर दी है। अपनी सरकार के छह महीने पूरे होने के मौके पर खटीमा में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं के चुनाव लड़ने पर जनता से ही हाथ उठवाकर समर्थन मांगकर जबाव मांग लिया। धामी ने कहा, खटीमा मेरी कर्मभूमि है, यहां की जनता का मुझ पर ऋण है। इस ऋण से मैं कभी उऋण नहीं हो सकता हूं।
मुख्यमंत्री बनने के बाद से पुष्कर सिंह धामी के चुनाव लड़ने को लेकर कई अटकलबाजियां चल रही थीं। कभी उन्हें नैनीताल जिले की किसी सीट से चुनाव लड़ने की बात उठ रही थीं, तो कभी उनके पिथौरागढ़ जिले के उनके पैतृक क्षेत्र से चुनाव लड़वाने की बात सामने आ रही थीं। अभी तक न तो मुख्यमंत्री और न ही भाजपा संगठन ने इस मुद्दे पर कोई बयान दिया था।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार के छह महीने पूरे होने पर राज्य भर में उत्सव का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने गृहक्षेत्र खटीमा से राज्य की जनता को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने एकाएक कहा, बीते दिनों एक पत्रकार ने मुझसे पूछा कि आप खटीमा से ही चुनाव लड़ेंगे। मैं आपसे पूछता हूं क्या मुझे खटीमा से चुनाव लड़ना चाहिए। मुख्यमंत्री के इतना कहते ही पूरा मैदान ‘हमारा विधायक कैसा हो पुष्कर सिंह धामी जैसा हो’ के नारों से गूंज उठा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आपके ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकता। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने स्वयं की सीट के बारे में चल रही चर्चाओं को विराम दे दिया।
खटीमा की मुझे एक-एक गली याद है
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके बाद खटीमा में कराए गए विकास कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, खटीमा की मुझे एक एक गली याद है। खुद यहां के कामों की समीक्षा करता हूं। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है इस विधानसभा क्षेत्र का चौतरफा विकास हो रहा है। आईटीआई, पॉलिटेक्निक खुला, केंद्रीय विद्यालय मिला। उन्होंने कहा कि यह जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है। उनके बच्चों को भी मौका मिलना चाहिए। इसीलिए एकलव्य आवासीय विद्यालय का न सिर्फ शिलान्यास कराया बल्कि लोकार्पण भी कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक का बेटा हूं, इसलिए सैनिकों का दर्द समझता हूं। सैनिक परिवारों को बनबसा की कैंटीन में लंबी कतार न लगानी पड़ी इसलिए खटीमा में कैंटीन खोल दी गई।
