एनजीटी ने राजस्थान के मुख्य सचिव को लगाई फटकार, जाने वजह…
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बीकानेर के एक गांव में कृषि भूमि पर सीवेज का दूषित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने के एक मामले में सेवानिवृत्ति का बहाना बनाकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश नहीं होने पर राजस्थान के मुख्य सचिव को फटकार लगाई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार …
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बीकानेर के एक गांव में कृषि भूमि पर सीवेज का दूषित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने के एक मामले में सेवानिवृत्ति का बहाना बनाकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश नहीं होने पर राजस्थान के मुख्य सचिव को फटकार लगाई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि सेवानिवृत्ति हलफनामा दाखिल नहीं करने और वीडियो कॉफ्रेंस के जरिए पेश नहीं होने का स्पष्टीकरण नहीं हो सकता है।
पीठ ने कहा कि अगर मुख्य सचिव को सेवानिवृत्त होना है, तो वह सेवानिवृत्ति से पहले काम करना बंद नहीं कर सकते हैं। अगर उनमें ऐसी अक्षमता है, तो प्रशासन के हित में, उन्हें ऐसे अन्य लोगों के लिए मार्ग प्रशस्त करना चाहिए जो प्रदर्शन कर सकते हैं। पीठ ने कहा, कि “हम राजस्थान के मौजूदा और आने वाले मुख्य सचिवों को निर्देश देते हैं कि उपरोक्त टिप्पणियों के मद्देनजर और 21 सितंबर 2021 के आदेश के पालन के लिए संबंधित अधिकारियों के समन्वय में तत्काल उपचारात्मक उपाय करें और दो महीने के अंदर अनुपालन रिपोर्ट ई-मेल से भेजें।”
एनजीटी ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा 31 मार्च, 2018 तक जरूरी शोधन संयंत्र स्थापित करने की समय सीमा के विपरीत, इसमें विलंब के बारे में किसी जवाबदेही के ही एक लंबी समय-सीमा प्रस्तावित की गई है। अधिकरण ने कहा कि राज्य में दूसरे स्थानों की स्थिति बताई नहीं गयी है। पीठ ने कहा कि, “प्रासंगिक आंकड़े दिए जाने चाहिए थे या कम से कम एक बयान दिया जाना चाहिए था कि सीवेज का दूषित पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।” वहीं पाठ ने कहा कि अधिकरण ने इसकी निगरानी का निर्देश मुख्य सचिव स्तर पर करने के लिए दिया था लेकिन रिपोर्ट में इस पहलू का कोई जिक्र नहीं है।
पीठ ने यह भी कहा कि, “मुख्य सचिव का वीडियो कॉफ्रेंस के जरिए पेश नहीं होने का फैसला, अनुपालन को लेकर हलफनामा दाखिल करने में विफलता या इस अधिकरण के निर्देश के बावजूद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना, दुर्भाग्यपूर्ण है।” पीठ ने छह जनवरी के आदेश में कहा, “वकील ने केवल मौखिक रूप से सिर्फ स्पष्टीकरण दिया कि वह (मुख्य सचिव) इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।” अधिकरण राजस्थान निवासी भंवर लाल भार्गव की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें बीकानेर के नोखा गांव में कृषि भूमि पर सीवेज का दूषित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने का आरोप लगाया गया है।
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