बाराबंकी : दरियाबाद की सियासी पिच पर अब तक नहीं दौड़ सकी ‘हाथी’

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बाराबंकी। विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, सेनाएं तैयार हैं। बस सेनापति का इंतजार है। अभी तक कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार दरियाबाद सीट से चित्रा वर्मा को बनाया है। वहीं भाजपा की तरफ से सतीशचंद्र शर्मा को ही उनके समर्थक प्रत्याशी बनाये जाने की बात कर रहे है। जबकि सपा से पूर्व विधायक रहे …

बाराबंकी। विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, सेनाएं तैयार हैं। बस सेनापति का इंतजार है। अभी तक कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार दरियाबाद सीट से चित्रा वर्मा को बनाया है। वहीं भाजपा की तरफ से सतीशचंद्र शर्मा को ही उनके समर्थक प्रत्याशी बनाये जाने की बात कर रहे है। जबकि सपा से पूर्व विधायक रहे राजा राजीव कुमार सिंह के पुत्र रितेश सिंह रिंकू को प्रत्याशी बनाये जाने की उम्मीद राजा समर्थक भी जता रहे है। पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मैं भाग्य आज महेश करने जा रहे राष्ट्रीय किसान क्रांति दल ने भी यहां रामजी तिवारी को प्रत्याशी बनाकर राजनीतिक दलों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।

बसपा के प्रत्याशी पर अभी अटकलें लगी है। जिले की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट दरियाबाद में वर्ष 1962 के बाद हुए चुनाव में इस सीट पर 4 बार कांग्रेस, 3 बार भाजपा, 3 बार सपा, 2 बार जनता पार्टी, एक बार भारतीय क्रांतिदल, एक बार जनसंघ और एक बार निर्दल प्रत्याशी का कब्जा रहा है। लेकिन यहां की शियासी पिच पर हाथी अब तक दौड़ नहीं लगा सका है।

इस सीट पर हाथी ने 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में हुंकार भरी और उपविजेता रहा। लेकिन जीत की दौड़ में पीछे ही रह गया। वहीं इस विधानसभा सीट पर अनुसूचित जाति व मुस्लिम वोटरों की अच्छी तादात है। बसपा ने यहां की सियासी पिच पर मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे, लेकिन उनका प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा। 2002 के विधानसभा चुनाव में यहां से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े नजामुल हसन नुमानी तीसरे स्थान तक ही पहुंच सके।

हालांकि 2007 व 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा को यहां पर बढ़त जरूर मिली। 2007 और 2012 में बसपा ने अपना प्रत्याशी सामान्य वर्ग से चुना और यहां से बसपा से चुनाव लड़े विवेकानंद पांडेय ने विधानसभा चुनाव में वोट बैंक ही बढ़ाने तक ही कामयाब नही रहे। बल्कि बसपा के हाथी को दूसरे स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया। व इन दोनों चुनाव में रनर प्रत्याशी भी रहे। लेकिन इस सीट पर बसपा के हाथी को जीत का दर्जा दिलाने में नाकामयाब रहे। वहीं 2017 में इस सीट पर एक बार फिर बसपा ने मुस्लिम दांव खेला व 2017 के चुनाव में मोहम्मद मुब्बशिर को प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा लेकिन मोदी लहर में वह भी नाकामयाब ही रहे। वोटों का विखराव हुआ।

वोट का ग्राफ गिरा और वह तृतीय स्थान पर ही सिमट कर रह गये। और बसपा की स्थित 2002 वाली 2017 के विधान सभा चुनाव में भी हो गयी। और पार्टी तीसरे स्थान पर सिमट कर रह गयी। 2022 के चुनाव में देखना यह है कि इस विधानसभा चुनाव में बसपा के हाथी को जनता अपना साथी बनाएगी या बसपा जिले की दरियाबाद सीट पर विजय पताका लहराने में कामयाम होगी। या दरियाबाद में इस विधान सभा चुनाव में हाथी किस करवट बैठेगा यह भविष्य के गर्भ में है । बसपा इस बार किस पर दांव लगाती है। व बसपा की नैया का खेवैया कौन होगा । अभी इसकी घोषणा पार्टी की तरफ से नहीं हुई है । वही सम्भावित प्रत्याशी जनसंपर्क में लगे है।

फैक्ट फाइल

विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 4 लाख 10 हजार 877।
पुरुष मतदाता 2 लाख 16 हजार 221
महिला मतदाता 01 लाख 94 हजार 647
थर्ड जेंडर 09
पाँच वर्ष में बढ़े मतदाता
पुरुष – 6683
महिला – 8062

दो दशक में क्या रहे नतीजे

सन प्रत्याशी प्राप्त मत प्रतिशत

2002 नजामुल हसननुमानी 34512- 26.41
2007 विवेकानंद पाण्डेय 42840 – 33.01
2012 विवेकानंद पाण्डेय 64253 – 27.26
2017 मो मुब्बशिर 54512 21. 41

जातीय आंकड़ा

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इस विधानसभा में ब्राह्मण दस प्रतिशत क्षत्रिय दस, कायस्थ एक, वैश्य एक, कुर्मी दस, मुस्लिम 21, यादव 13, रावत 9, गौतम 6, मौर्य 6, लोध दो, कहार एक, गड़रिया दो, निषाद एक , अन्य सामान्य एक, अन्य पिछड़ा 0.5, और अन्य 0.5, मतदाता है।

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