हल्द्वानी: वसंत पंचमी पर पांडवाज देंगे “समलौण”
दीपिका नेगी रावत, हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड के पांडवाज किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर दिल में अपनी जगह बनाने वाले पांडवाज ने गांवों की सामाजिक समस्याओं पर आधारित लोकगीत बनाकर अपनी अलग पहचान कायम की है। घुघुती-बसुती, फुलारी, शकुना दे की सफलता के बाद पांडवाज अपने अगले वीडियो …
दीपिका नेगी रावत, हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड के पांडवाज किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर दिल में अपनी जगह बनाने वाले पांडवाज ने गांवों की सामाजिक समस्याओं पर आधारित लोकगीत बनाकर अपनी अलग पहचान कायम की है। घुघुती-बसुती, फुलारी, शकुना दे की सफलता के बाद पांडवाज अपने अगले वीडियो एल्बम ‘समलौण’ को रिलीज करने की तैयारी में हैं।
जैसा कि नाम से ही जाहिर होता है समलौंण, यानि की भेंट…गढ़वाल में जब व्यक्ति किसी को अपनी संवेदना और भावनाओं का संगम भेंट करता है तो यह तोहफा अनमोल हो जाता है और इसे ही समलौंण कहते हैं। गीत के निर्देशक कुनाल डोभाल ने बताया कि गीत वसंत पंचमी तक रिलीज करने की योजना है। इस गीत में पहाड़ी व्यक्ति की सादगी, भोलापन और आतिथ्य भाव देखने को मिलेगा, जो बताएगा कि पहाड़ में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही यहां की व्यक्तिगत सुंदरता भी काफी खूबसूरत होती है।
समलौंण गीत के बोल हैं…थक बिसरैइयां, कुलैं का छैला, बांजा छौय पाणी पी जइयां…
इस गीत के म्यूजिक डायरेक्टर ईशान डोभाल हैं, जिन्होंने म्यूजिक के जरिए हर इमोशन को छूने की कोशिश की है। आत्मा प्रकाश बमोला, और सुशांत भट्ट ने अपनी भावपूर्ण आवाज से इस गीत में चार चांद लगाए हैं। गीत के बोल भी दोनों गायकों ने लिखे हैं। शूटिंग चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी जिले में की गई है। यह पांडवज की टाइम मशीन सीरीज का पार्ट-5 होगा। डीओपी का काम सलिल डोभाल ने संभाला है।
यकुलांस फिल्म से मिला जनता का अपार स्नेह
पांडवाज ईशान, कुनाल और सलिल डोभाल तीन भाईयों का क्रिएशन ग्रुप है। समलौण से पहले वह यकुलांस फिल्म लेकर आए थे, जिसकी स्क्रिप्ट के लिए उन्हें देवभूमि की जनता का अपार स्नेह मिला था।
यकुलांस में यानि कि अकेलापन… पांडवज प्रोडक्शन की शॉर्ट फिल्म ‘यकुलांस- द घोस्ट ऑफ विलेज’ में उत्तराखंड की यह हकीकत बयां की गई कि पिछले एक दशक में उत्तराखंड से पांच लाख से ज्यादा लोगों का पलायन हुआ है। जिससे पहाड़ में बसे 3,946 गांव भूत गांव बन गए हैं। इसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति की कहानी थी, जो अकेलेपन में अपने मवेशियों से बात करते थे।
