यूपी चुनाव 2022: आरक्षण समर्थक कर्मचारियों ने लिया ये बड़ा संकल्प
लखनऊ। प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रत्येक वर्ग की राजनीतिक दलों से अपनी-अपनी मांगे हैं। इसी कड़ी में कर्मचारी भी प्रदेश में बनने वाली नई सरकार से अपनी उम्मीदों के पूरे किये जाने की संभावना तलाश रहे हैं। पुरानी पेंशन की बहाली और बिजली विभाग के निजीकरण न किये जाने की मांग …
लखनऊ। प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रत्येक वर्ग की राजनीतिक दलों से अपनी-अपनी मांगे हैं। इसी कड़ी में कर्मचारी भी प्रदेश में बनने वाली नई सरकार से अपनी उम्मीदों के पूरे किये जाने की संभावना तलाश रहे हैं। पुरानी पेंशन की बहाली और बिजली विभाग के निजीकरण न किये जाने की मांग के बाद आज प्रदेश के करीब आठ लाख आरक्षण समर्थक कर्मचारियों ने ऐसी सरकार बनाने का संकल्प लिया है, जो नौकरियों में उनके वर्ग के हितों की रक्षा कर सकें।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मंगलवार को आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक मंडल कोर ग्रुप के सभी संयोजको ने संकल्प लिया कि प्रदेश की सभी 86 सुरक्षित विधानसभा सीटों पर वोट का बंटवारा नहीं होने देंगे तथा सभी कर्मचारी व उनके परिजन एकजुट होकर ऐसा जन प्रतिनिधि चुनेंगे जो आरक्षण पर हो रहे कुठाराघात को रोकने के लिए अपना शतप्रतिशत योगदान दे सके।
संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने कहा अभी तक किसी भी पार्टी ने इस बात का एलान नहीं किया है की दलित व पिछड़े वर्गाे के लिए पदोनतियो में आरक्षण की व्यवस्था सरकार बनने के बाद उनकी पार्टी बहाल करेगी। उन्होंने कहा कि सभी आरक्षण समर्थक कर्मचारी जागरूकता अभियान को लगातार घर-घर तक पहुंचाते हुये यह जरूर बताये कि किस-किस पार्टी ने बाबा साहब द्वारा बनाई गयी आरक्षण व्यवस्था पर कुठाराघात किया हैं।
उन्होंने सभी दलों के नेताओ से सवाल किया कि गरीब सवर्ण को 10 प्रतिशत आरक्षण से हमें कोई परेशानी नहीं हैं लेकिन पिछले 10 साल से पदोनतियो में आरक्षण का 117वां बिल लोकसभा में लंबित है उस पर बात करने तक की किसी को फुर्सत नहीं हैं। वर्मा ने कहा कि इस बार चुनाव में सभी दलो को पता चल जायेगा की आठ लाख आरक्षण समर्थक और उनके नाते रिस्तेदार इस बार आरक्षण समर्थक सरकार बनाकर ही दम लेंगे।
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