हल्द्वानी: कड़कड़ाती ठंड में सीलन भरे फर्श में बैठ कर पढ़ने को मजबूर बेटियां…अफसोस!
हल्द्वानी, अमृत विचार। शहर का सबसे बड़ा स्कूल और बदइंतजामी का यह आलम की छात्राओं को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह स्कूल शहर के बीचोंबीच स्थित है। अब इसे क्या समझाया जाए आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि मॉडल स्कूल की बात …
हल्द्वानी, अमृत विचार। शहर का सबसे बड़ा स्कूल और बदइंतजामी का यह आलम की छात्राओं को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह स्कूल शहर के बीचोंबीच स्थित है। अब इसे क्या समझाया जाए आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि मॉडल स्कूल की बात करने वाली सरकार कितनी शिद्दत से कार्य कर रही है। खैर यह तस्वीर है राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की जहां हाईस्कूल एवं इंटर की छात्राएं ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा अधिकारियों को कई बार इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुयी।
विद्यालय का कक्ष पूरी तरह सीलन से लैस है, न यहां प्रकाश की समुचित व्यवस्था है, ऐसे में बेचारी छात्राएं कंपकंपी छुटा देने वाली सर्दी में विद्यालय आ रही हैं और मजबूरन जमीन पर बैठना पड़ रहा है। इनकी पीढ़ा देखने, समझने वाली शिक्षिकाएं भी मौन हैं क्योकि उन्हें भी केवल अपनी ड्यूटी अदा करनी है।

यह वही विद्यालय है जहां वर्ष भर सरकारी-गैर सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन होते रहता है पर किसी भी संस्था,नेता,विधायक,सामाजिक कार्यकर्ता की नजर इस बात पर नहीं जाती कि छात्राओं को मूलभूत सुविधाएं भी दी गयीं हैं या नहीं। यह तस्वीर तमाचा है उन संस्थाओं और नेताओं के मुंह पर जो यहां दौरा तो करते हैं और खुद की वाहवाही लूटने पर छात्राओं की तालियों की गड़गड़ाहट पर खुद को गौरवान्वित समझते हैं। लेकिन पढ़ाई करने के लिए छात्राओं को इस कदर परेशानी झेलनी पड़ती है इस बात से शायद ही किसी को सरोकार हो।
शहर के कालाढूंगी रोड स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में छात्राएं सर्दी के मौसम में जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। कॉलेज के कई कमरे तो ऐसे हैं जहां रोशनी भी पर्याप्त नहीं है।
रोशनी के अभाव में बालिकाओं को पढ़ने में परेशानी होती है, लेकिन इससे किसी को कोई सरोकार नहीं है। हाईस्कूल की छात्रा रश्मि पंत ने बताया कि उन्हें पढ़ने में काफी परेशानी होती है, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता है। इसी तरह इंटर की छात्रा प्रज्ञा नेगी ने बताया कि सर्दी में पढ़ने में मन नहीं लगता है। सभी स्कूलों में कुर्सी मेज पर बैठकर पढ़ाया जाता है, लेकिन यहां फर्नीचर का अभाव है।
कई बार फर्नीचर के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन कोई जबाव नहीं मिला। छात्राओं के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करने को व्यक्तिगत रूप से भी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
-देवकी आर्या, प्रधानाचार्य, जीजीआईसी
