काशीपुर: बारिश से अब तक मटर, लाही, आलू की फसल को 80 फीसदी क्षति

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काशीपुर, अमृत विचार। बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। लाही, मटर की फसल बर्बाद होने से किसानों के आगे आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। दरअसल जनवरी-फरवरी में तीन बार बेमौसमी बारिश हो चुकी है। गुरुवार सुबह से ही हवा के साथ रिमझिम …

काशीपुर, अमृत विचार। बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। लाही, मटर की फसल बर्बाद होने से किसानों के आगे आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।

दरअसल जनवरी-फरवरी में तीन बार बेमौसमी बारिश हो चुकी है। गुरुवार सुबह से ही हवा के साथ रिमझिम बारिश होती रही। खेतों में बारिश का पानी भरने से लाही, मटर की फसल बर्बाद हो गई है। खेत में बिछी लाही की फसल देखकर किसान परेशान है। किसान विकास क्लब के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर में मटर, करीब चार हजार हेक्टेयर में आलू, 4500 हेक्टेयर में लाही और करीब एक हजार हेक्टेयर में चने की फसल उगाई गई है।

अभी किसान हाल ही में हुई बारिश की मार से उबरा भी नहीं था कि फिर बारिश ने सितम ढा दिया है। मटर की फसल में करीब 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत आती है। तीन बार बेमौसमी बारिश से मटर, आलू, लाही, चने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसान को फसल की लागत मिलना भी मुश्किल है। सरकार दलहन व तिलहन फसल पर अधिक जोर दे रही है।

इसलिए किसान इन फसलों उगा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों को बर्बाद फसलों का मुआवजा देना चाहिए। भाकियू युवा प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने बताया कि खेत में बारिश का पानी भरने से फसल सड़ने-गलने लगेगी। सरसों, लाही, मटर, आलू की फसल खराब हो चुकी है। हवा से गन्ना भी गिर गया है। सरकार को करीब 20 हजार रुपये प्रति एकड़ हिसाब से मुआवजा देना चाहिए। वहीं, बारिश से ठिठुरन बढ़ने पर लोग घरों में दुबके रहे।

बारिश से जिले में करीब 25-30 प्रतिशत आलू, मटर, लाही की फसल को नुकसान हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र में भी करीब दो एकड़ लाही व मटर की फसल खराब हो चुकी है। कृषि व उद्यान विभाग सर्वे कराकर फसलों के नुकसान का आकलन करता है। इसके बाद मुआवजे की कार्यवाही होती है। आपदाओं को देखते हुए किसानों को फसलों का बीमा कराना चाहिए।

– डॉ. जितेंद्र क्वात्रा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र, काशीपुर

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