गोरखपुर पहुंचे सीएम योगी, कहा- सपा का नाम समाजवादी, सोच परिवारवादी और काम दंगावादी

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गोरखपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पूर्व के शासनकाल को सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की योजनाओं के प्रति विफलता को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सपा का नाम समाजवादी, सोच परिवारवादी और काम दंगावादी है। सपा सरकार ने गुंडे, माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए थे। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को …

गोरखपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पूर्व के शासनकाल को सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की योजनाओं के प्रति विफलता को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सपा का नाम समाजवादी, सोच परिवारवादी और काम दंगावादी है। सपा सरकार ने गुंडे, माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए थे। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को दी जाने वाली पेंशन अपनी पार्टी के पदाधिकारियों को समाजवादी पेंशन के नाम पर बांट दी थी। जनता ने सपा की तुलना में बीते पांच साल में भाजपा की डबल इंजन सरकार को देखा है। आज उसका परिणाम है कि पूरे प्रदेश में भाजपा को जनता का प्रचंड समर्थन मिल रहा है। बच्चा-बच्चा भाजपा चिल्ला रहा है।

तीन दिवसीय दौरे पर गुरुवार दोपहर बाद गोरखपुर पहुंचे सीएम योगी सिविल लाइंस स्थित एक मैरेज हाल में पदाधिकारी बैठक को संबोधित कर रहे थे। विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के लिए पार्टीजनों में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि वह लगातार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में चुनाव प्रचार में जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग की कतिपय पाबंदियों के चलते सभाओं में लोगों की संख्या सीमित की गई है लेकिन सड़कों पर जनता का उत्साह देखते ही बनता है।

सिर्फ अपने परिवार के लिए काम करता है जाति की बात करने वाला

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गरीबों के कल्याण के लिए भाजपा भाजपा सरकार की तमाम योजनाओं को विस्तार से बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गरीब की कोई जाति नहीं होती। जाति की बात करने वाले अवसर मिलने पर सिर्फ अपने परिवार के कल्याण के लिए काम करते हैं। किसी गरीब से पूछिए कि पिछली सरकार ने उसके लिए क्या किया।

उत्तर प्रदेश में सपा सरकार ने महज 18 हजार पीएम आवास स्वीकृत कराए थे, वह भी लोगों को दिए नहीं। जबकि भाजपा सरकार ने 43.50 लाख गरीबों को बिना जातीय भेदभाव के पीएम आवास दिए हैं। न तो किसी गरीब को सिफारिश करनी पड़ी और न ही कहीं किसी को रुपया देना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार ने जितने पीएम आवास पूरे प्रदेश में नहीं स्वीकृत कराए उससे अधिक 32 हजार हमने सिर्फ गोरखपुर महानगर में गरीबों को बनाकर दिए हैं। पूरे जिले में यह संख्या एक लाख से भी अधिक है।

पेंशन निराश्रितों के लिए है, छंटे गुंडों के लिए नहीं

पेंशन योजना को लेकर भी सीएम योगी पूर्व की सपा सरकार पर खासे हमलावर रहे। उन्होंने कहा कि पूर्व में दिव्यांगों को 300, बुजुर्गों को 400 और विधवाओं को 500 रुपये दी जाने वाली पेंशन को भी सपा सरकार ने रोक दिया था। पेंशन का यह पैसा वह अपने पार्टी के पदाधिकारियों में समाजवादी पेंशन के नाम पर बांट रही थी। भाजपा की सरकार बनने पर हमने तय किया कि पेंशन निराश्रितों के लिए है, छंटे गुंडों के लिए नहीं। यही नहीं सरकार ने पेंशन की धनराशि भी बढ़ा दी है। भाजपा की सरकार प्रदेश में एक करोड़ पात्र लोगों को 12000 रुपये सालाना पेंशन दे रही है।

15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की डबल डोज

सीएम ने कहा कि जब 2017 में भाजपा की सरकार बनी तो राशनकार्डों की जांच कराई गई। 40 लाख कार्ड फर्जी पाए गए। इन पर राशन तो उठता था लेकिन गरीब के पास नहीं पहुंचता था। जबकि आज बीजेपी की डबल इंजन सरकार प्रदेश में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का डबल डोज दे रही है। इस दौरान कुशीनगर के मुसहरों का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2016 में वह भूख से मर रहे।मुसहरों के बीच गए थे। उनके घर में अन्न का एक दाना नहीं था। मैंने 2003 में आंदोलन कर उनके राशनकार्ड बनवाए थे। पूछने पर पता चला कि सपा सरकार ने उनके राशनकार्ड निरस्त कर सपाइयों को दे दिए थे। आज जब भाजपा सरकार है किसी भी मुसहर की मौत भूख से नहीं हुई है। सबको पर्याप्त खाद्यान्न मिल रहा है।

जिनका सारा काम अंधेरे में, वो बिजली कैसे देते

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की सपा-बसपा सरकारों में बिजली तक नहीं मिलती थी। जिनका खुद का सारा काम अंधेरे में होता था तो वह जनता को बिजली कैसे देते। आज भाजपा सरकार में गांव गांव तक लोगों को भरपूर बिजली मिल रही है।

पांच साल में इंसेफलाइटिस स्वाहा

पूर्वी उत्तर प्रदेश की त्रासदी रही इंसेफलाइटिस के नियंत्रण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समन्वित प्रयासों से बीते पांच सालों में इंसेफलाइटिस को स्वाहा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इंसेफलाइटिस से मरने वाले सर्वाधिक बच्चे अनुसूचित और अल्पसंख्यक समाज के होते थे। सवाल उनकी जाति का नहीं था, यह बच्चे समाज के बच्चे थे। पर बच्चे तो वोट बैंक होते नहीं इसलिए पूर्व की सरकारें उनके बारे में सोचती भी नहीं थीं। जब सोच ईमानदार नहीं होती है तो काम भी दमदार नहीं होते हैं।

 

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