पश्चिम यूपी में बंटे हैं किसानों की एकजुट करने वाली खाप के वोट

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नवीन गुप्ता/अमृत विचार। पश्चिम उप्र के मेरठ और सहारनपुर मंडल की सीटों पर सबकी निगाहें है। मुद्दे बहुत हैं, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा ध्रुवीकरण और विकास का है तो दूसरा धड़ा चौधरी खानदान की इज्जत की दुहाई देता नजर आता है। इन सबके बीच मुजफ्फरनगर दंगा और पलायन की बातें भी चर्चा में हैं। मुजफ्फरनगर और …

नवीन गुप्ता/अमृत विचार। पश्चिम उप्र के मेरठ और सहारनपुर मंडल की सीटों पर सबकी निगाहें है। मुद्दे बहुत हैं, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा ध्रुवीकरण और विकास का है तो दूसरा धड़ा चौधरी खानदान की इज्जत की दुहाई देता नजर आता है। इन सबके बीच मुजफ्फरनगर दंगा और पलायन की बातें भी चर्चा में हैं। मुजफ्फरनगर और शामली जिले की जाट बैल्ट जयंत से हमदर्दी तो जताती है, लेकिन रालोद के सपा से गठबंधन कर लेने से खुश नहीं है। जाटों को एकजुट करने वाली बालियान खाप के वोट बंट चुके हैं। जाट वोट कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में है।

बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र की सिसौली किसानों की राजधानी कहा जाता है। ये गांव महेंद्र सिंह टिकैत का है। अब यहां से उनके पुत्र राकेश टिकैत और नरेश टिकैत किसानों की आवाज उठाते हैं। 15 हजार मतदाताओं वाले सिसौली में लोगों की राय एक नहीं है। कभी लखनऊ तक सीधी बस सेवा वाले सिसौली में परिवहन के साधन भी मुद्दा बने हैं। शिक्षा और चिकित्सा के लिए भी शामली या मुजफ्फरनगर पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव में कोई खास चुनावी हलचल नजर नहीं आती। कभी यहीं से प्रदेश की राजनीति तय होती थी। अब यहां चौपाल में चर्चा के नाम पर स्थानीय मुद्दे हैं।

किसान आंदोलन की बात तो उठती है लेकिन ये मुद्दा चुनाव पर ज्यादा असर डाल पाएगा, नहीं लगता। बिजली और गन्ना भुगतान को भी किसान मुख्य मुद्दा नहीं मानते। हां, जयंत चौधरी का प्रभाव गांव में जरूर नजर आता है। गांव में लगने वाली चौपाल पर बात दोनों दलों की होती है। भाजपा से केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान गिल शिकवे मिटाने किसान भवन जा चुके हैं तो गठबंधन के लिए समर्थन मांगने रालोद मुखिया जयंत भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत से मिल चुके हैं। नरेश टिकैट और राकेश टिकैत ने खुलकर किसी को समर्थन नहीं दिया है, मतदान से ठीक पहले भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों से अपने विवेक से वोट करने का एलान जरूर किया है।

सपा रालोद गठबंधन किसानों को खुद के पाले में मान रहा है तो भाजपा भी जाटों को अपना मानकर जीत का दावा कर रही है। 2017 के चुनाव में भी भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने अंतरआत्मा की आवाज पर वोट देने का आह्वान किया था। तब यहां से भाजपा के उमेश मलिक ने करीब 98 हजार वोट लेकर सपा के प्रमोद त्यागी को 13 हजार वोटों से हराया था। इस बार भी भाजपा ने उमेश मलिक पर ही दांव लगाया है। गठबंधन प्रत्याशी भी जाट समुदाय से राजपाल बालियान हैं।

सिसौली के नई आबादी क्षेत्र में कुछ किसान खिली धूप में हुक्का गुडगुड़ा रहे थे। समर्थन के मुद्दे पर वीरपाल कहते हैं किसान भवन से आदेश होता तो और बात होती। अब तो फैसला किसानों पर ही है। सपा रालोद गठबंधन पर उनका कहना है कि सपा सरकार में दंगा किसके इशारे पर हुआ, नुकसान हमें पहुंचाया गया। चौधरी उस सरकार को कभी माफ नहीं करेगा। राजपाल कहते हैं इस सरकार में विकास तो हुआ है। हमारा मान भी रखा गया। हरेंद्र जयंत का अपना चौधरी बताते हैं। सुखपाल, हरपाल सिंह का मानना है कि अपराध कम हुए हैं, जो पिछली सरकार नहीं कर पायी।

सिसौली से लगभग दो किलोमीटर गांव मुंडभर है। चौपाल पर हुक्के के साथ चल रही थी चुनावी चर्चा। राजीव कहते हैं बात मर्जी की है, किसी पर जबरदस्ती भी नहीं की जा सकती। किसान ही एकजुट नहीं है, इसी का फायदा राजनीतिक दल उठाते रहे हैं। सरकार के स्तर से किसानों को लाभ हो भी जाए, लेकिन जो हम लोगों के साथ पक्षपात होता है, उसका भी ध्यान रखना चाहिए। सरेशपाल कहते हैं भाजपा ने भी क्या नुकसान किया, किसानों के हित में फैसले भी आए हैं। भौराखुद गांव के विक्रम सिंह कहते हैं कोई सी भी सरकार आए, गांव में कोई पूछने नहीं आता। जो सरकारी अधिकारी है, वो तो यही रहेंगे। इनका स्वभाव बदलने वाला नहीं। लगभग 10 हजार मतदाताओं वाले शौरम गांव भी बालियान खाप का गांव है। यहां भी दंगे का दर्द दिखाई देता है। वोट भी बंटे नजर आते हैं। कुटबा कुटबी गांव केंद्रीय मंत्री संजीव वालियान का है। यहां पर उनका अच्छा खासा प्रभाव नजर आता है। इसी गांव के वीरेंद्र बालियान कहते हैं मुद्दे तो बाद की बात है, संजीव की बात पहले है।

कमजोर पड़ी गठवाला की गांठ
बुढ़ाना और शामली विधानसभा क्षेत्र में गठवाला खाप के 52 गांव हैं। बुढ़ाना सीट से खरड़, फुगाना, मौहम्मदपुर रायसिंह, खेड़ा मस्तान, डूंगर, शरणावली आदि 11 गांव आते हैं, जबकि शामली सीट से लिसाढ़, बहावड़ी, किवाना, मखमूलपुर आदि 41 गांव आते हैं। खाप को लेकर लिसाढ़ गांव महत्वपूर्ण है। वोट किसको देंगे, इस मुद्दे पर बोलने से जरा भी गुरेज नहीं। खाप के ही हरेंद्र सिंह कहते हैं किसान आंदोलन लंबा चला, लेकिन सरकार ने सुनी तो हमारी ही। सपा सरकार में हुए दंगे में गठवाला के दर्जनों युवकों में किसके इशारे पर जेल में बंद किया गया था, हमें पता है। जयंत को उनके साथ नहीं जाना था। कैराना में सपा से नाहिद हसन को टिकट देना भी अखर रहा है। अजय, हरीकिशन, विजेंद्र चौधरी जयंत की पैरवी करते नजर आए। सोहन सिंह किसान आंदोलन को लेकर सरकार से नाराज हैं।

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