हल्द्वानी: अनदेखी से नाराज 174 किन्नरों ने नहीं लिया लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा
बबीता पटवाल, हल्द्वानी। अब कि बार चुनाव में सिर्फ महिला-पुरुष नहीं बल्कि किन्नर (थर्ड जेंडर) मतदाताओं का भी रूझान मतदान के लिए नहीं दिखाई दिया। कुमाऊं में 54 में से सिर्फ 13 किन्नरों ने ही लोकतंत्र के महापर्व में मत की आहुति दी। वहीं, नैनीताल और पिथौरागढ़ जनपद में तो यह आंकड़ा शून्य रहा। हालत …
बबीता पटवाल, हल्द्वानी। अब कि बार चुनाव में सिर्फ महिला-पुरुष नहीं बल्कि किन्नर (थर्ड जेंडर) मतदाताओं का भी रूझान मतदान के लिए नहीं दिखाई दिया। कुमाऊं में 54 में से सिर्फ 13 किन्नरों ने ही लोकतंत्र के महापर्व में मत की आहुति दी। वहीं, नैनीताल और पिथौरागढ़ जनपद में तो यह आंकड़ा शून्य रहा। हालत यह है कि कुमाऊं में किन्नरों के मतदान 25 प्रतिशत से भी कम रहा। इस आंकड़े ने स्वीप के मतदाता जागरूकता की हवा निकाल दी है।
जिला निवार्चन के आंकड़ों के अनुसार, कुमाऊं के चार जनपदों में 54 किन्नर मतदाता हैं। इनमें सबसे ज्यादा ऊधम सिंह नगर में 40, नैनीताल में 12, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में एक-एक किन्नर मतदाता हैं। इधर, इस बार स्वीप ने मतदाता जागरूकता के बड़े-बड़े दावे किए गए। स्वीप टीम ने बर्फबारी, शादी-बारात, बर्थडे पार्टी, रिमोट एरिया में जाकर लोगों को मतदान के प्रति जागरूक किया। हैरानी की बात यह है कि स्वीप टीम शहर के बीचों बीच रहने वाले किन्नरों को मतदान के प्रति जागरूक नहीं कर सकी। इसी का नतीजा कहे कि विधानसभा चुनाव के मतदान में किन्नर भी वोटिंग के प्रति उदासीन रहे। कुमाऊं में 54 में सिर्फ 13 ने ही वोट दिया। किन्नरों समुदाय के मत प्रतिशत ने स्वीप के साथ ही राज्य सरकार के उन दावों को भी फुस्स कर दिया है जिसमें किन्नरों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की बात कही जाती है।
== गढ़वाल में 234 में 60 ने दिए वोट ==
निर्वाचन विभाग के अनुसार, राज्य में 288 किन्नर मतदाता हैं। इनमें गढ़वाल मंडल में 234 और कुमाऊं में 54 मतदाता हैं। गढ़वाल में 234 में से सिर्फ 60 किन्नरों ने ही मतदान किया जबकि शासन-प्रशासन की अनदेखी से नाराज 174 किन्नरों ने लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा नहीं लिया।
= किन्नरों के लिए योजनाएं छह, लेकिन लाभान्वित एक भी नहीं ==
इसे सरकारी तंत्र का नाकारपन ही कहेंगे, निर्वाचन ने कुमाऊं में 54 किन्नर चिन्हित कर लिए लेकिन राज्य सरकार एक भी किन्नर नहीं ढूंढ सकी। दरअसल, राज्य सरकार ने किन्नरों व उनके बच्चों के लिए छह योजनाएं चला रही हैं लेकिन समाज कल्याण विभाग अभी तक एक भी किन्नर को चिन्हित नहीं कर पाया है ।
किन्नरों को योजना का लाभ देंगे बोलते हैं, लेकिन आज तक हमसे हमारी जरूरतों के बारे में भी नहीं पूछा गया। मतदान करके ऐसी सरकार नहीं बनानी जो किन्नरों के हित में नहीं सोचती है। – शीला मौसी, अध्यक्ष, किन्नर समुदाय हल्द्वानी
स्वीप टीम किन्नरों को जागरूक करने कालाढूंगी गई थी लेकिन वहां एक भी किन्नर नहीं मिला। जो किन्नर मिले हैं, उन पर संशय था कि वे हमारे मतदाता हैं या नहीं, इसलिए उन्हें जागरूक नहीं किया।
= सुरेश अधिकारी, जिला कोआर्डिनेटर, स्वीप टीम नैनीताल
