बरेली: निजी स्कूलों की लैब में प्रयोग करेंगे सरकारी के छात्र
बरेली,अमृत विचार। शासन की ओर से शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को विकसित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। शासन ने इस दिशा में एक और पहल करते हुए निजी और सरकारी स्कूलों के बीच सामंजस्य स्थापित कर छात्रों को सुगमतापूर्वक शिक्षा देने की योजना बनाई है। इससे न सिर्फ संसाधनों की …
बरेली,अमृत विचार। शासन की ओर से शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को विकसित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। शासन ने इस दिशा में एक और पहल करते हुए निजी और सरकारी स्कूलों के बीच सामंजस्य स्थापित कर छात्रों को सुगमतापूर्वक शिक्षा देने की योजना बनाई है।
इससे न सिर्फ संसाधनों की कमी के बीच पढ़ाई करने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों को लाभ मिलेगा बल्कि निजी स्कूलों को भी इसका लाभ मिलेगा। शासन की इस पहल को धरातल पर साकार करने के लिए बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी इसकी रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं। इसके तहत निजी स्कूलों की प्रयोगशाला व पुस्तकालय का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों के छात्र भी कर सकेंगे।
कम से कम एक स्कूल को साथ जोड़ें
इस योजना को उपयोगी बनाने के लिए सरकारी स्कूल के नजदीक के कम से कम एक निजी स्कूल के साथ सामंजस्य स्थापित करना होगा। ताकि स्कूलों में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग सरकारी स्कूल के छात्र भी कर सकें। आम तौर पर सरकारी स्कूलों में प्रयोगशाला और पुस्तकालायों की उपलब्धता नहीं होती जबकि सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम एक समान है।
इसलिए सरकारी स्कूल के छात्र निजी स्कूल की प्रयोगशाला और पुस्तकालाय में पुस्तकों का उपयोग करेंगे। डीआईओएस डा. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि शासन की यह योजना छात्र हित में बेहद कारगर होगी। बल्कि निजी स्कूलों को भी जरूरत पड़ने पर सरकारी स्कूलों का मैदान मुहैया कराया जाएगा। जिससे खेल प्रतियोगिता व कार्यक्रमों का आयोजन आसानी से हो सके । इसके लिए फिलहाल रूपरेखा तैयार की जा रही है।
उपकरणों पर जमी है धूल
सरकार की ओर से स्कूलों में व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन वास्तविकता किसी से छिपी नहीं है। माध्यमिक स्कूलों की बात करें तो प्रयोगशाला के लिए प्रतिवर्ष हजारों रुपये की ग्रांट आती है। जो सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जाती है। जिन स्कूलों में प्रयोगशालाएं चल रही हैं उनमें रखे रसायन भी निष्क्रिय होते जा रहे हैं और उपकरणों पर धूल जमी पड़ी है। ऐसे में यदि सरकार की यह योजना मूर्त रूप लेती है तो निश्चित रूप से छात्रों के उज्जवल भविष्य की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
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