हल्द्वानी: पहाड़ में मंद पड़ रहा उच्च शिक्षा का उजियारा

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बबीता पटवाल, अमृत विचार, हल्द्वानी। शहरी चकाचौंध में पहाड़ के गांव वीरान होने के साथ उच्च शिक्षा का उजियारा भी मंद पड़ रहा है। पर्वतीय जिलों के राजकीय महाविद्यालयों में जहां छात्र-छात्राओं की संख्या लगातार घट रही है तो मैदानी जिलों में लगातार इजाफा हो रहा है। पूरे राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में …

बबीता पटवाल, अमृत विचार, हल्द्वानी। शहरी चकाचौंध में पहाड़ के गांव वीरान होने के साथ उच्च शिक्षा का उजियारा भी मंद पड़ रहा है। पर्वतीय जिलों के राजकीय महाविद्यालयों में जहां छात्र-छात्राओं की संख्या लगातार घट रही है तो मैदानी जिलों में लगातार इजाफा हो रहा है। पूरे राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में नैनीताल जिला सबसे आगे चल रहा है।

राज्य के शिक्षा निदेशालय के अनुसार, नैनीताल जिले में मौजूद राजकीय महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या राज्य में सबसे अधिक है। इस जिले के राजकीय महाविद्यालों में कुल 24,410 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जबकि गढ़वाल मंडल का हरिद्वार जिला इस मामले में पिछड़ गया है। यहां के पांच राजकीय महाविद्यालयों में महज 1276 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नैनीताल जिले के बाद छात्र-छात्राओं की सबसे अधिक संख्या ऊधमसिंह नगर जिले में है जबकि पिथौरागढ़ इस मामले में तीसरे नंबर और राजधानी देहरादून चौथे नंबर पर है। इसके अलावा अन्य पर्वतीय जिलों में मौजूद राजकीय महाविद्यालयों में साल-दर-साल छात्र-छात्राओं की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है।
सुविधाएं न संसाधन

इसकी सबसे बड़ी वजह सुविधाओं और संसाधन का अभाव मानी जा रही है। दरअसल, मैदानी इलाकों में सुविधाएं और संसाधन सरल सुलभ हैं जबकि पर्वतीय जिलों में दुश्वारियां है। पर्वतीय जिलों में शिक्षा हासिल करने के बाद नौकरी के लिए मैदानी जिलों में ही उतरना पड़ता है। वहीं, मैदानी जिलों के राजकीय महाविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी के अवसर प्राप्त करने के मौके अधिक होते हैं।

जनसंख्या व शिक्षा में सुविधाओं की कमी ने पर्वतीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों को वीरान कर दिया है। पर्वतीय जिलों में कई महाविद्यालय केवल दो ही कमरों में सिमटकर रह गए हैं, ऐसे में विद्यार्थी दूसरे राज्यों में पढ़ने जाते हैं।

– डॉ. रश्मि पंत, विभागाध्यक्ष (मनोविज्ञान)

पलायन और आम जरूरतों के कारण बच्चों ने बाहर शिक्षा लेनी शुरू कर दी है। वर्तमान में बच्चे अब विदेश में पढ़ने की योजना बनाने लगे हैं। हालांकि पर्वतीय क्षेत्रों के पुराने महाविद्यालयों में पूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। नए विद्यालयों में सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।

– प्रमोद कुमार पाठक, उच्च शिक्षा निदेशक

जिला                       विद्यार्थी
नैनीताल                   24410
ऊधमसिंह नगर        18646
पिथौरागढ़                  9785
अल्मोड़ा                    6094
बागेश्वर                      3226
देहरादून                    8522
चमोली                      8002
पौड़ी                         7916
चंपावत                      5538
उत्तरकाशी                 4638
टिहरी                        3742
रूद्रप्रयाग                  3470
हरिद्वार                      1276

(आंकड़े उच्च शिक्षा निदेशालय से लिये गये हैं)

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